बापू की तस्वीर के नीचे 'इंकलाब जिंदाबाद':मंत्रीजी बोले-'कसम खाओ, शराब नहीं पिओगे'; SDM साहब का 'जलवा'

Actionpunjab
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नमस्कार श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ में SDM साहब पर वकील बिगड़ गए। उनके चेंबर में घुसकर दरवाजे पर दे दनादन लातें जमा दीं। जयपुर में खेल मंत्रीजी का मोटिवेशनल गुरु वाला अवतार नजर आया। बारां में शिक्षा मंत्रीजी ने कहा-हाथ उठाकर कसम खाओ, शराब का सेवन नहीं करोगे। बाड़मेर में SDM साहब की ‘पोशाक’ ने खूब जलवा बिखेरा। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. बापू की तस्वीर के नीचे ‘इंकलाब जिंदाबाद’ वकीलों का रुतबा इतना बढ़ गया है कि सरकार उनसे जलने लगी है। श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ में ऐसा ही ऐलान करते हुए वकीलों ने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाए। वकील साहब का जोश आसमान पर। बोले- सरकार हमसे जलती है। हमें बजट नहीं दिया। वकील अपना हक लेकर रहेंगे। सूरतगढ़ में वकीलों को नया कोर्ट चाहिए। बजट चाहिए। वकील धरना-अनशन कर रहे थे। एसडीएम साहब को ज्ञापन देने वकीलों का एक दल उनके ऑफिस पहुंचे। एसडीएम साहब लंच करने गए थे। उन्हें वहां न पाकर वकीलों का पारा चढ़ गया। उन्होंने कहा- प्रशासन हमसे बात ही नहीं करना चाहता। एसडीएम साहब आए तो एक साथ कई वकील ऊंची आवाज में अपनी बात कहने लगे। साहब ने कहा- टोन नीचे करो। उत्साही वकील ने कहा- क्या कर लोगे? यह सुनते ही एसडीएम कुर्सी से उठे और पीछे के दरवाजे से निकल गए। वकीलों ने आपा खो दिया। जिस गेट से एसडीएम निकलकर गए थे, उसी पर लातें जमाना शुरू कर दिया। दरवाजे के ठीक ऊपर बापू की तस्वीर लगी थी। 2. मंत्रीजी का मोटिवेशनल गुरु वाला अवतार खेल मंत्रीजी सेना में रहे। एक जवान के रूप में करगिल युद्ध लड़ा। उनकी निशानीबाजी का जलवा ऐसा कि ओलिंपिक में डबल ट्रैप शूटिंग में चांदी जीती। इसके बाद राजनीति के मैदान में उतरे तो खेलों के प्रति युवाओं में जज्बा पैदा किया। शहर-शहर में ग्रामीण स्टेडियम बने। युवाओं का खेलों में रुझान बढ़ा। हाल ही मंत्रीजी का मोटिवेशन गुरु वाला अवतार भी दिखा। वे जयपुर के एक स्कूल में पहुंचे थे। स्कूल में छात्रों के साथ अभिभावक भी आए थे। मंत्रीजी ने पूछा- रील कौन-कौन देखता है। कई बच्चों ने हाथ खड़े किए। एक बच्चे ने तो सवाल पूरा होने से पहले ही हाथ उठा दिया। दूसरा सवाल अभिभावकों से था। पूछा- ये बताओ दूसरे की कॉपी लेकर कितने अभिभावक होमवर्क कराते हैं। कुछ अभिभावकों ने भी हाथ उठाया। बच्चों से पूछा- माता पिता के लिए कोई कानून बनाना हो तो क्या कानून बनाओगे? एक बच्ची बोली-माता पिता गलती पर ही डाटें, बेवजह नहीं। आखिर में मंत्रीजी ने अभिभावकों को इशारों में बड़ी बात कह दी। बोले- ज्यादातर बच्चे वही करते हैं जो वो देखते हैं। खेल मंत्री कहीं जाएं और खेल न हो, ये कैसे हो सकता है। मंत्रीजी एक स्कूल में पहुंचे जहां बच्चों ने वॉलीबॉल खेलने की डिमांड कर दी। मंत्रीजी बोले- चलो मैदान में। 3. मंत्रीजी बोले-खाओ कसम, शराब का सेवन नहीं करोगे शबरी माता की जयंती थी। समारोह बनाया जा रहा था। संत महंत आए थे। शिक्षा मंत्रीजी को भी बुला लिया गया। शिक्षा मंत्रीजी समाज की बात करते-करते शराब पर आ गए। मंच से सभा संबोधित करते हुए बोले-एक बात कहनी है। कौन कौन मेरी बात मानेगा, जरा हाथ खड़े करो। सभा में मौजूद सभी लोगों ने हाथ खड़े कर लिए। मंत्रीजी ने कहा- जो मेरी बात नहीं मान सकते हाथ नीचे कर लो। कुछ लोगों ने हाथ नीचे भी कुछ। कुछ दबी हंसी हंसने लगे। मंत्री ने कहा- सौगंध खाओ। हम शबरी माता की सौगंध खाते हैं। हम महाराणा प्रताप की सौगंध खाते हैं। हम लक्ष्मण महाराज की सौगंध खाते हैं कि आज के बाद शराब का सेवन नहीं करेंगे। कुछ लोगों ने गुपचुप हाथ नीचे सरका लिया। कुछ और लोग दबी हंसी हंसने लगे। मंत्रीजी ने गारंटी दी। कहा- मैं गारंटी देता हूं, अगर कसम पर कायम रहे तो दस बीस साल बाद आप बड़े आदमी बन जाओगे। मंत्रीजी ने शराब के नुकसान गिनाकर कहा- अगर मुझे 6 महीने बाद पता चला कि आपने सौगंध पूरी कर ली है तो फिर मैं आपको सरकार की तरफ से जो कुछ मिल सकता है, सब कुछ दूंगा। 4. चलते-चलते.. बत्तीलगी सफेद कार से सिंधी पगड़ी कसे युवक निकलता है। सफेद धोती-कमीज की पारंपरिक वेशभूषा। ये एसडीएम साहब हैं। साहब के साथ एक सहयोगी है जो वीडियो शूट कर रहा है। साहब के सीढ़ियों पर चढ़ते हुए। बाहें फैलाते हुए। चेयर पर बैठते हुए। काम संभालते हुए। साहब हर गतिविधि करते हुए मुस्कुरा रहे हैं। वीडियो शूट होने के बाद एडिट होता है। एडिट होने के बाद धमाकेदार धुन पर रील बनाई जाती है और सोशल मीडिया उनकी रील से गुलजार हो जाता है। रील का जमाना है। साहब का देसी अंदाज भी हाथों हाथ लिया गया। रील चमकी और साहब भी चमके। लेकिन प्रशासनिक पद के डेकोरम को लेकर सवाल उठा तो सोशल मीडिया पर जातिवाद बनाम डेकोरम की बहस चल पड़ी। लालजी पांडे ने एक फिल्मी गीत लिखा था- जो है नाम वाला वही तो बदनाम है। फिलहाल बहस जारी है और रील पर व्यूज बढ़ते जा रहे हैं। इनपुट सहयोग- प्रेम सुथार (सूरतगढ़), शुभम निमोदिया (बारां), विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..

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