गुयाना के मंत्री ने हिंदी में भाषण दिया, वीडियो वायरल:विपक्ष को चुनौती दी, बोले- मैं बिना कागज के हिंदी में बहस को तैयार

Actionpunjab
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दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना की संसद में भारतीय मूल के मंत्री विकाश रामकिसून का हिंदी में दिया गया भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। संसद सत्र के दौरान उन्होंने विपक्ष के उस दावे का जवाब हिंदी में दिया, जिसमें कहा गया था कि उन्हें हिंदी नहीं आती। विपक्षी सांसद विष्णु पांडेय ने सदन में टिप्पणी की कि विकाश रामकिसून को हिंदी का एक शब्द भी नहीं आता। इस पर रामकिसून ने स्पीकर से अनुमति ली और कहा कि वे इसी मुद्दे पर हिंदी में जवाब देना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने हिंदी में बोलते हुए विपक्षी सांसद को खुली चुनौती दी। रामकिसून ने कहा, “मैं अभी इसी वक्त उन्हें चुनौती देता हूं कि किसी भी स्तर पर, किसी भी जगह पर, विषय वे तय करें और मैं बिना कागज देखे हिंदी में बहस करूंगा।” पूरा वीडियो यहां देखिए… मंत्री के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया वायरल मंत्री विकाश रामकिसून के भाषण का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, जिसे बड़ी संख्या में लोग देख और शेयर कर रहे हैं। यह वीडियो भारत के उच्चायोग की ओर से गुयाना की राजधानी जॉर्जटाउन से X पर पोस्ट किया गया था। इसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया और भारत समेत कई देशों में लोग मंत्री की हिंदी की तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा कि हिंदी को लेकर उठाया गया सवाल अनावश्यक था और मंत्री ने बिना किसी नोट्स के हिंदी में जवाब देकर अपनी भाषा की पकड़ साबित कर दी। विकाश रामकिसून वर्तमान में गुयाना के कृषि मंत्रालय में मंत्री हैं। वे पहले संसद में कृषि मंत्रालय के संसदीय सचिव भी रह चुके हैं। गुयाना में भारतीय मूल की 40% आबादी गुयाना में भारतीय मूल की आबादी बड़ी संख्या में रहती है। कुल आबादी का करीब 40% हिस्सा भारतीय मूल के लोगों का है। यह किसी भी लैटिन अमेरिकी देश में भारतीय प्रवासियों की सबसे बड़ी आबादी है। गुयाना में भारतीयों की मौजूदगी की शुरुआत 5 मई 1838 से मानी जाती है। इस दिन भारत से 396 गिरमिटिया मजदूरों को ब्रिटिश गुयाना लाया गया था। ये मजदूर मुख्य रूप से उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए थे और उन्हें गन्ना उद्योग में काम के लिए लाया गया था। इसके बाद करीब एक सदी तक चलती रही गिरमिटिया प्रथा के दौरान हजारों भारतीय यहां बसते चले गए। समय के साथ भारतीय मूल के लोगों ने खेती, व्यापार और मजदूरी से आगे बढ़कर शिक्षा, प्रशासन और राजनीति में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। आज गुयाना की राजनीति में कई मंत्री, सांसद और बड़े नेता भारतीय मूल से आते हैं। सांस्कृतिक स्तर पर भारतीय समुदाय ने अपनी परंपराओं और भाषाओं को भी सहेज कर रखा है। हिंदी और भोजपुरी जैसी भाषाएं आज भी धार्मिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों और पारिवारिक बातचीत में सुनाई देती हैं। दिवाली, फगुआ (होली) और अन्य भारतीय त्योहार गुयाना की राष्ट्रीय संस्कृति का हिस्सा बन चुके हैं।

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