लक्ष्मण झूला के बाद बजरंग सेतु ऋषिकेश की नई पहचान:57 मीटर नीचे गंगा, ऊपर कांच का रास्ता; केदारनाथ डिजाइन बना आकर्षण

Actionpunjab
7 Min Read




ऋषिकेश में 93 साल पुराने लक्ष्मण झूला के बाद अब ‘बजरंग सेतु’ नई पहचान बनकर उभरा है। 57 मीटर नीचे बहती गंगा और ऊपर कांच के पारदर्शी डेक के साथ इस पुल पर केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार पाइलंस इसे अलग आकर्षण देते हैं। दैनिक भास्कर टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो 2019 से पसरे सन्नाटे की जगह फिर से रौनक दिखाई दी। ड्रिल मशीनों की आवाज और मजदूरों की गतिविधियां बता रही थीं कि इंतजार की घड़ियां खत्म होने वाली हैं। अधिकारियों का दावा है कि ग्लास डेक वाला यह अपनी तरह का देश का विशिष्ट सस्पेंशन ब्रिज है। हालांकि आधिकारिक उद्घाटन अभी बाकी है, लेकिन स्थानीय जरूरत और पर्यटकों के दबाव को देखते हुए पुल को सीमित रूप से आवाजाही के लिए खोल दिया गया है। जिससे सूनी पड़ी दुकानों में फिर से चहल-पहल लौट आई है। अब 3 प्वाइंट्स में समझिए बजरंग सेतु की खासियत… 1. रोंगटे खड़े करने वाला ग्लास वॉक पुल के दोनों किनारों पर 1.5 मीटर चौड़ी पट्टी में 65 मिमी मोटा टफन ग्लास लगाया गया है। यह मल्टी-लेयर सुरक्षा तकनीक से तैयार कांच है, जो भारी दबाव सहने में सक्षम है। इस पर चलते समय ऐसा एहसास होता है जैसे आप हवा में तैर रहे हों। पैरों के नीचे 57 मीटर गहराई में बहती गंगा की धाराएं साफ दिखाई देती हैं। बीच-बीच में बनाए गए ‘व्यू प्वाइंट’ इसे और खास बनाते हैं। यहां रेलिंग का घेरा थोड़ा बाहर की ओर निकाला गया है, ताकि पर्यटक सुरक्षित तरीके से खड़े होकर घाटी और पहाड़ों का पैनोरमिक व्यू ले सकें। सोशल मीडिया के दौर में यह पुल सेल्फी और रील्स का नया हॉटस्पॉट बनने लगा है। 2. प्रवेश द्वार पर केदारनाथ की झलक ऋषिकेश चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए पुल के प्रवेश द्वार और पाइलंस को केदारनाथ मंदिर की आकृति दी गई है। पत्थरनुमा फिनिश और शिखर शैली इसे धार्मिक आभा प्रदान करती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस पुल पर कदम रखते ही मंदिर परिसर जैसा आभास होता है। 3. थ्री-लेन से स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट पुराने पुल पर पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहनों के बीच अक्सर जाम लगता था। नए सेतु में बीच की दो 2-2 मीटर चौड़ी लेन हल्के वाहनों के लिए हैं, जबकि दोनों ओर 1.5-1.5 मीटर का ग्लास वॉकवे केवल पैदल यात्रियों के लिए आरक्षित है। इससे पैदल और वाहन यातायात अलग-अलग हो गया है। भीड़ के दौरान भी सुरक्षा बनी रहेगी और जाम की समस्या कम होगी। 2019 के बाद अब लौटी रौनक जुलाई 2019 में आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट के आधार पर लक्ष्मण झूला को असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था। बाजारों में सन्नाटा छा गया था। दुकानदारों के अनुसार कारोबार 70–80% तक गिर गया था। अब बजरंग सेतु के खुलने से बाजार फिर से गुलजार हैं। टैक्सी चालकों और रेस्टोरेंट संचालकों को राहत मिली है। स्थानीय लोग इसे आजीविका की ‘संजीवनी’ मान रहे हैं। इंजीनियरिंग की चुनौती 132.30 मीटर लंबे स्पान वाले इस पुल का निर्माण 2022 में शुरू हुआ। तेज बहाव और घाटी की भौगोलिक चुनौतियों के बीच इसे खड़ा करना आसान नहीं था। अब मुख्य ढांचा तैयार है, फिनिशिंग का काम जारी है। पीडब्ल्यूडी के एचओडी राजेश चंद्र शर्मा के मुताबिक, विशेष ऑर्डर पर मंगाए गए कांच और सुरक्षा मानकों के कारण समय लगा। लक्ष्य है कि 28 फरवरी तक इसे पूरी तरह जनता को समर्पित कर दिया जाए। दो जिलों को जोड़ेगा सेतु यह पुल टिहरी गढ़वाल (तपोवन) और पौड़ी गढ़वाल (स्वर्गाश्रम/लक्ष्मण झूला क्षेत्र) को जोड़ता है। अभी तक लोगों को राम झूला या जानकी सेतु से होकर गुजरना पड़ता था, जहां अक्सर भीड़ रहती है। अनुमान है कि नए पुल से ट्रैफिक लोड 40% तक कम होगा और कांवड़ यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन आसान होगा। सुरक्षा में नई तकनीक पुल के डेक में फाइबर रिइन्फोर्स्ड पॉलिमर (एफआरपी) का उपयोग किया गया है, जो जंग-रोधी और हल्का होने के साथ मजबूत भी है। पुल को 500 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर भार सहने के लिए डिजाइन किया गया है। तेज हवाओं को ध्यान में रखते हुए विंड टेस्टिंग की गई है। 24×7 निगरानी के लिए हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं और भविष्य में भीड़ का दबाव मापने वाले सेंसर भी लगाए जा सकते हैं। पर्यटन का गेम चेंजर योग और राफ्टिंग के लिए प्रसिद्ध ऋषिकेश अब ‘ग्लास वॉक’ के कारण एडवेंचर टूरिज्म का नया केंद्र बनने जा रहा है। रात में एलईडी रोशनी से सजा पुल गंगा आरती के समय अलग ही दृश्य पेश करेगा। बजरंग सेतु विरासत और विकास के संगम की नई कहानी लिख रहा है। अब बस आधिकारिक उद्घाटन की प्रतीक्षा है, जिसके बाद यह पुल ऋषिकेश की पहचान को नई ऊंचाई देगा। ——————– ये खबर भी पढ़ें : 22 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट: महाशिवरात्रि पर उखीमठ में तिथि घोषित, 2025 के मुकाबले 10 दिन पहले शुरू होगी यात्रा उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट इस साल 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खुलेंगे। महाशिवरात्रि के अवसर पर पंचकेदार गद्दी स्थल उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में वैदिक विधि-विधान और पंचांग गणना के बाद शुभ मुहूर्त की औपचारिक घोषणा की गई। इस वर्ष कपाट वृष लग्न में खुलेंगे, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। (पढ़ें पूरी खबर)

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *