MMSY हेल्थ कार्ड को लेकर सियासी घमासान:AAP कार्यकर्ताओं पर पर्ची बांटने के आरोप; DC ने सिविल सर्जन को सौंपी जांच

Actionpunjab
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पंजाब के लुधियाना में मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के हेल्थ कार्ड बनाने को लेकर शहर में विवाद खड़ा हो गया है। वार्ड नंबर 26 के कांग्रेस पार्षद गौरव भट्टी ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता लोगों से वोटर आईडी और मोबाइल नंबर लेकर पर्चियां बांट रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि इन्हीं पर्चियों के जरिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में नया हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड बनाया जा सकेगा। मामले को गंभीरता से लेते हुए डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने जांच सिविल सर्जन को सौंप दी है। उन्होंने मीडिया से कहा कि शिकायत को रिपोर्ट के लिए सिविल सर्जन को मार्क किया गया है। DC हिमांशु जैन ने मीडिया से कहा कि “सरकार द्वारा जारी एसओपी का सख्ती से पालन किया जा रहा है। यदि किसी को कहीं भेदभाव या पक्षपात महसूस होता है तो वे नोडल अधिकारी को पूरी जानकारी दें। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पार्षद ने उठाए ये सवाल कांग्रेस पार्षद गौरव भट्टी ने DC से पूछा कि क्या यह पर्ची सरकारी है या गैर-सरकारी? क्या बिना AAP की पर्ची के CSC संचालक हेल्थ कार्ड बना सकते हैं या नहीं? अगर पर्ची सरकारी है तो फिर यह सुविधा केंद्र, सेवा केंद्र या अन्य सरकारी दफ्तरों में क्यों नहीं दी जा रही? भट्टी ने मीडिया को बताया कि उन्होंने शहर दौरे पर आए स्वास्थ्य मंत्री डाक्टर बलबीर सिंह से भी मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाया। भट्टी का दावा है कि मंत्री ने कहा कि पर्ची का एक उद्देश्य है और इसे जारी करने के लिए सरकारी अधिकारी लगाए जाएंगे, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पर्ची का उद्देश्य क्या है। CSC बंद करने और दबाव बनाने के आरोप
भट्टी ने आरोप लगाया कि उनके इलाके में एक CSC संचालक ने बिना AAP पर्ची के हेल्थ कार्ड जारी किया तो उसका केंद्र जबरन बंद करवा दिया गया। अन्य CSC संचालकों पर भी दबाव बनाया जा रहा है कि वे पर्ची के बिना कार्ड जारी न करें। उन्होंने कहा कि “मेरे क्षेत्र में लोग पर्ची कटवाने के नाम पर घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें परेशानी और अपमान झेलना पड़ रहा है। प्रशासन की जांच जारी
फिलहाल जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। सिविल सर्जन की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। मामले ने MMSY योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

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