फरहान अख्तर ने जयपुर में स्टूडेंट्स के सामने लगाए पुशअप:लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट में सुनाए अपने लिखे गीत, कविता के जरिए ‘मर्द’ की बताई परिभाषा

Actionpunjab
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जयपुर की जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वार्षिक यूथ फेस्ट ‘जेयू रिदम 2026’ का समापन बॉलीवुड के मल्टीटैलेंटेड सुपरस्टार फरहान अख्तर की ऊर्जावान प्रस्तुति के साथ हुआ। उनके लाइव कॉन्सर्ट ने पूरे कैंपस को संगीत और ऊर्जा से सराबोर कर दिया। फरहान ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत ‘सुन लो सुन लो’ से की। इसके बाद उन्होंने ‘दिल जैसे धड़के धड़कने दो’, ‘मैं ऐसा क्यों हूं’, ‘हे या’, ‘सोचा है’, ‘छू ले आसमान’, ‘आहिस्ता आहिस्ता’, ‘ना ना ना’ जैसे गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। हर गीत पर छात्र-छात्राएं झूमते नजर आए। कॉन्सर्ट के दौरान फरहान ने ‘मर्द कौन’ शीर्षक से एक प्रभावशाली कविता सुनाई, जिसमें उन्होंने पुरुषों से महिलाओं और लड़कियों के सम्मान को प्राथमिकता देने की अपील की। उनकी ‘दिल आखिर क्यों रोता है’ कविता ने भी दर्शकों को भावुक कर दिया। युवा सिंगर सैनन ने भी ‘खुले आसमान में परिंदे’ गीत प्रस्तुत कर समां बांधा और पूरे कार्यक्रम के दौरान सैनन ने फरहान का भरपूर साथ दिया। अंत में फरहान ने ‘सेनोरिटा’ गीत गाकर कार्यक्रम का समापन किया और सभी का दिल जीत लिया। दमदार स्टेज प्रजेंस और फिटनेस का प्रदर्शन लाइव परफॉर्मेंस के दौरान फरहान ने अपनी जबरदस्त एनर्जी और स्टेज प्रजेंस से छात्रों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने मंच पर पुशअप लगाकर अपनी फिटनेस का प्रदर्शन भी किया, जिसे देखकर दर्शक उत्साह से भर उठे। एक स्टूडेंट छोटा गिटार लेकर आया था, जिस पर फरहान ने ऑटोग्राफ दिए और उसे दिखाकर सभी को अपने म्यूजिक प्रेम को दर्शाया। इस दौरान फरहान की भावपूर्ण शायरी और संवादों ने युवाओं के साथ एक विशेष जुड़ाव स्थापित किया।

फेस्ट का तीसरा दिन टैलेंट, टेक्नोलॉजी और आर्ट के कॉम्बिनेशन के रूप में नजर आया। दिन में ‘प्रोफेसर ऑफ हाउ’ के नाम से प्रसिद्ध किशोर नरुका ने अपने सत्र के माध्यम से छात्रों को गहराई से प्रेरित किया। उन्होंने पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए कहा कि केवल निरंतरता ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि हर प्रयास के साथ स्वयं को बेहतर बनाना ही वास्तविक प्रगति का मार्ग है। एक साधारण छात्र से पेशेवर क्रिएटर बनने तक की अपनी यात्रा साझा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी शॉर्टकट का परिणाम नहीं, बल्कि मजबूत जिद और दृढ़ता (रेजिलिएंस) का फल है। टेक्निकल स्किल्स और एआई के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए उन्होंने स्टूडेंट्स को सिर्फ टेक्नोलॉजी का ‘कंज्यूमर’ बनने के बजाय ‘क्रिएटर’ बनने के लिए इंस्पायर किया। इसके साथ ही उन्होंने एक अवेयर सोसाइटी की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, एजुकेशन का असली पर्पज सवाल पूछने का करेज जुटाना है। पॉलिसी लेवल के डिसीजन्स हर लाइफ को गहराई से अफेक्ट करते हैं, इसलिए सोशल और पॉलिटिकल मुद्दों पर न्यूट्रल रहना असल में एक बड़ी गलती है। वूमेन इन स्पोर्ट्स” की भावना को सशक्त बनाते हुए यूनिवर्सिटी के नवनिर्मित स्पोर्ट्स एरिना में महिला खिलाड़ियों ने बॉक्स क्रिकेट, बैडमिंटन, पिकल बॉल और लॉन टेनिस में अपने कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। इसके साथ ही फुटबॉल और वॉलीबॉल जैसे खेलों में विभिन्न टीमों ने उत्कृष्ट टीमवर्क और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। वहीं मीडिया वर्टिकल में स्टूडेंट्स की क्रिएटिविटी अपने पीक पर थी। ‘रीलोमेनिया’, ‘रिदम डायरीज’ और ‘सिनेवर्स’ जैसे इवेंट्स के जरिए पार्टिसिपेंट्स ने आर्ट ऑफ सिनेमा, विज़ुअल स्टोरीटेलिंग, कैमरा एंगल्स और वॉइस-ओवर मॉड्यूलेशन में अपनी एक्सपर्टीज शोकेस की। इसी क्रिएटिव इकोसिस्टम को सपोर्ट करते हुए फेस्ट में एक डेडिकेटेड ‘इन्फ्लुएंशियल एक्सपीरियंस जोन’ भी सेटअप किया गया था, जहाँ जाने-माने इन्फ्लुएंसर्स ने डिजिटल क्रिएशन, मॉडर्न स्टोरीटेलिंग और पर्सनल ब्रांडिंग पर अपने वैल्युएबल इनसाइट्स शेयर किए।

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