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धौलपुर जिले में इस सीजन आलू की फसल किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। उत्पादन में आई गिरावट और मंडी में मिल रहे कम भाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि कई किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। किसानों ने बताया कि एक बीघा आलू की फसल तैयार करने में लगभग 40 से 45 हजार रुपए तक की लागत आती है। इसमें बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, जुताई और मजदूरी का खर्च शामिल है। हालांकि, इस बार उत्पादन अपेक्षा से काफी कम हुआ है। सामान्य परिस्थितियों में एक बीघा जमीन से लगभग 150 बोरा आलू निकलता है, जबकि इस बार मात्र 80 से 100 बोरा तक ही उत्पादन हो पा रहा है। किसानों को हो रहा भारी नुकसान
उत्पादन में गिरावट के साथ-साथ मंडी में भी आलू के दाम बेहद कम मिल रहे हैं। वर्तमान में 230 से 250 रुपए प्रति बोरा की दर से खरीद हो रही है, जो लागत के मुकाबले काफी कम है। किसानों का कहना है कि इस भाव पर फसल बेचने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने सरकार से आर्थिक सहायता और उचित समर्थन मूल्य देने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती लागत, फसलों में रोग और मौसम की अनिश्चितता के कारण खेती हर सीजन में घाटे का सौदा बनती जा रही है।
आलू के साथ-साथ सरसों की फसल में भी रोग के कारण नुकसान देखने को मिल रहा है। ऐसे में किसान अब गेहूं की फसल से उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि कुछ हद तक आर्थिक स्थिति संभल सके।
धौलपुर में आलू की फसल घाटे का सौदा:उत्पादन घटा, मंडी में नहीं मिल रहे वाजिब दाम
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