उज्जैन4 घंटे पहले
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काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता की कार में नरमुंड रखे होने का दावा भी है। इसके साथ ही वे रात में तंत्र साधना करती हैं।
उज्जैन में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की बैठक के दौरान चार नए महामंडलेश्वरों का पट्टाभिषेक किया गया। इनमें 27 साल की काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। वे देश की सबसे कम उम्र में महामंडलेश्वर बनने वाली किन्नर संत बताई जा रही हैं।
काली नंद गिरी अपने अघोरी स्वरूप के कारण भी सुर्खियों में हैं। उन्हें पहली किन्नर अघोरी के रूप में भी देखा जा रहा है। वे शरीर पर चिता की राख लगाती हैं, काले वस्त्र पहनती हैं, नाक में बड़ी नथ और खुली जटाओं में नजर आती हैं। अक्सर वे कार से यात्रा करती हैं। कार में नरमुंड रखने का भी दावा किया जाता है। काली नंद गिरी का कहना है कि उन्हें 18 भाषाओं का ज्ञान है।

महामंडलेश्वर गिरी पहली किन्नर अघोरी भी हैं।
तेलंगाना की रहने वाली हैं काली नंद गिरी
किन्नर अखाड़े का दो दिवसीय कार्यक्रम 13 और 14 मार्च को उज्जैन के शिवांजलि गार्डन में रखा गया था। इस कार्यक्रम में तेलंगाना के मंचेरियल जिले की रहने वाली काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता को महामंडलेश्वर बनाया गया।
कार्यक्रम के बाद काली नंद गिरी उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर अघोर साधना करती हुई नजर आईं। उनका कहना है कि रात के समय तंत्र साधना का विशेष महत्व होता है, इसलिए वे श्मशान में साधना करती हैं।

13-14 मार्च को काली नंद गिरी को महामंडलेश्वर बनाया गया।
बचपन में ही चुन लिया संन्यास का रास्ता काली नंद गिरी ने बताया कि उन्होंने बचपन में ही माता-पिता को छोड़कर संन्यास का जीवन चुन लिया था। 6 साल की उम्र से ही तंत्र साधना सीखना शुरू कर दिया था। 12 साल की उम्र में वे काशी चली गईं। वहां एक संत ने उनकी मुलाकात किन्नर अखाड़े की सती नंद गिरी माता से कराई।

कामाख्या धाम में मिली तंत्र साधना की शिक्षा इन परिस्थितियों से परेशान होकर वे असम के कामाख्या धाम पहुंचीं। वहां उन्हें अपने गुरु मिले, जिन्होंने करीब 6 साल तक उन्हें तंत्र साधना की शिक्षा दी। उन्होंने बताया कि वे शुरू से ही धर्म-कर्म के कार्यों से जुड़ी रहीं। बाद में उनकी मुलाकात अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़े की आचार्य डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से हुई। उनके आशीर्वाद से ही वे किन्नर अखाड़े से जुड़ीं।
श्मशान और कार को ही बताया अपना घर
काली नंद गिरी का कहना है कि पिछले करीब 18 सालों से वे देश-विदेश में भ्रमण कर रही हैं। उनका स्थायी आश्रम नहीं है। अब तक श्मशान और कार में ही उनका निवास रहा है। हालांकि महामंडलेश्वर बनने के बाद उज्जैन में आश्रम बनाने का फैसला लिया है।

काली नंद गिरी अपनी कार से ही देश का भ्रमण करती हैं।
देश-विदेश में यात्रा के दौरान कई भाषा सीखीं
काली नंद गिरी का दावा है कि वे औपचारिक रूप से ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन देश-विदेश में यात्रा के दौरान उन्होंने कई भाषा सीखीं। उन्होंने अंग्रेजी सहित हिंदी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, मलयालम, गुजराती, उड़िया, पंजाबी, असमिया और मराठी समेत करीब 18 भाषाएं जानने का दावा किया है।

काली नंद गिरी रात में तंत्र साधना करतीं है।
सोशल मीडिया पर काली नंद गिरी के लाखों फॉलोअर्स
गूगल पर “THE WORLD FIRST LADY KINNER DIGAMBAR AGHORI MATA” सर्च करने पर मां काली नंद गिरी दिगंबर के बारे में ही जानकारी दिखाई देती है। किन्नर अघोरी माता का दावा है कि वह रोज सोशल मीडिया पर तंत्र साधना से जुड़ा एक वीडियो और अन्य वीडियो अपलोड करती हैं, जिन पर लाखों व्यूज मिलते हैं।
उनके सोशल मीडिया पर दो अकाउंट हैं और दोनों को मिलाकर करीब 6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। उनका कहना है कि उनके फॉलोअर्स सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में हैं।
कार से ही करती हैं देश-विदेश में भ्रमण, कार भी खास
मां काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता के पास अपनी कार भी है। वे देश-विदेश में इसी कार से भ्रमण करती हैं। कार के बोनट पर मां काली का बड़ा चित्र, नरमुंड के चित्र और सामने त्रिशूल लगा हुआ है। वहीं, कार के अंदर लगभग 70 सिद्ध नरमुंड रखे होने का दावा किया जाता है।
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