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केंद्र सरकार की महिला अनुकूल ग्राम पंचायत पहल का असर प्रदेश में भी दिखाई देने लगा है। पंचायत अचीवमेंट इंडेक्स की रिपोर्ट में प्रदेश की 100 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। यहां महिलाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर बेहतर काम हो रहा है। इन पंचायतों में महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के लिए कई कदम उठाए गए। सूची में सबसे अधिक भागीदारी चित्तौड़गढ़ और बीकानेर जिलों की है। चित्तौड़गढ़ और बीकानेर जिले की 10 व 13 पंचायतें शामिल है। हालांकि सौ ग्राम पंचायतों में केवल छह ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनका स्कोर 75 से ज्यादा है। बाकी 94 ग्राम पंचायतों का स्कोर 75 से कम होने से इन्हें बी श्रेणी में रखा गया है। 75 से ज्यादा स्कोर वाली पंचायतों में चित्तौड़गढ़ की दामाखेड़ा व मुगाना, डूंगरपुर की घुवेड़, अजमेर की मेओदा कलां, श्रीगंगानगर की 2 किमी घड़साना, बीकानेर की गजसुखदेसर पंचायत शामिल है। श्रीगंगानगर जिले की आठ पंचायतें इस सूची में शामिल हैं। इसके बाद धौलपुर, झुंझुनूं और सीकर से चार से सात पंचायतों ने महिला अनुकूल मानकों को पास किया है। टोंक और दौसा की पांच पंचायतें इसमें शामिल है। इसी तरह डूंगरपुर, अजमेर, जोधपुर, बाड़मेर/बालोतरा, कोटा, सवाई माधोपुर, उदयपुर, बांसवाड़ा और राजसमंद जिले की दो से तीन–तीन पंचायतों ने इस रैंकिंग में स्थान पाया है। झालावाड़ की चार, बूंदी- अलवर, बारां, पाली, जालोर की एक-एक, चूरू, नागौर, जयपुर, भीलवाड़ा और प्रतापगढ़ जिलों की दो–दो पंचायतें इस सूची में शामिल हैं। चित्तौड़गढ़ की मुगाणा, हथियाना, गोविंदपुरा, सिंहपुर, करजली, पांडोली, छप्पन, कनवा खेड़ा और भट्टों का बामनिया, डूंगरपुर में पिंडालवल व आसपुर, बीकानेर की गाडवाला, उत्तमामदेसर, रायसर, मोखखा, मैनसर, झारेली व अक्कासर भी शामिल है। गंगानगर की 19 जीडी, भोजे वाला, 2 एसडी, 21 एसजेएम और 9 एमआई, झुंझुनूं की बुगाला, भोड़की, सीथल व धनूरी पंचायत को भी सूची में स्थान मिला। बारां की तिसया, बूंदी की कालपुरिया, कोटा की बिसलाई, निमोदा एवं भंडाहेड़ा पंचायतों ने बी-परफॉर्मर श्रेणी में स्थान बनाया। धौलपुर की खिड़ोरा, पिपरोंन आदि इस सूची में हैं। जोधपुर की सियारा व गाजनावास, सीकर की कल्याणपुरा, थौकरिया व लाडपुरा पंचायत शामिल है। शिक्षा, स्वास्थ्य और समानता जैसे मापदंड तय महिला अनुकूल वातावरण बनाने के लिए शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और समानता जैसे मापदंड तय हैं। गर्भवतियों के पंजीकरण और टीकाकरण, स्कूलों में छात्रा संख्या, पंचायत की बैठकों में महिलाओं की उपस्थिति और बात रखने का अवसर देने के साथ स्वयं सहायता समूह का विकल्प होना भी जरूरी है।
पंचायत अचीवमेंट इंडेक्स:महिला सुरक्षा और उनके अनुकूल विकास पर आगे बढ़ी 100 ग्राम पंचायतें
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