राजन गोसाईं | अमृतसर पंजाब सरकार की ओर से मुख्यमंत्री श्रवण आशीर्वाद योजना के तहत सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर में मूक-बधिर बच्चों का मुफ्त इलाज शुरू हो गया है। योजना का मकसद ऐसे बच्चों को नई जिंदगी देना है जो बचपन से ठीक से सुन या बोल नहीं पाते। सरकार की पहल सुनन दा हक सबदा के तहत गरीब परिवारों के 0 से 5 साल बच्चों के लिए कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी पूरी तरह मुफ्त की जा रही है। मार्च में शुरू हुई योजना के तहत 5 बच्चों के ऑपरेशन कर दिए गए हैं। बता दें कि दैनिक भास्कर की ओर से जनवरी 2025 में इस संबंध में एक न्यूज प्रकाशित की गई थी कि इस समय अमृतसर के ईएनटी अस्पताल में ही करीब 25 से 30 बच्चे ऐसे हैं जो कॉकलियर इंप्लांट की वेटिंग लिस्ट में हैं। इस सर्जरी का खर्च ज्यादा होने के कारण गरीब अभिभावक बच्चों का इलाज करा पा रहे थे। कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी पर औसतन 9 से 10 लाख रुपए तक का खर्च आता है। जीएमसी के ईएनटी विभाग में डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम बच्चों की जांच और ऑपरेशन करती है। सर्जरी में इस्तेमाल होने वाला महंगा इंप्लांट डिवाइस और ऑपरेशन का पूरा खर्च पंजाब सरकार उठाती है, जिससे परिवारों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। योजना की खास बात यह है कि ऑपरेशन के बाद बच्चों को सुनने और बोलने की ट्रेनिंग (थेरेपी) भी दी जाती है, ताकि वे धीरे-धीरे सामान्य बच्चों की तरह बोलना और दूसरों से बातचीत करना सीख सकें। योजना का लाभ उन बच्चों को मिल सकता है जिनकी उम्र 5 साल से कम है, जिन्हें गंभीर सुनने की समस्या है और जो पंजाब के निवासी हैं। 5 बच्चों का ऑपरेशन कर मेग्नेट व इलेक्ट्रॉड्स को इंप्लांट कर दिया गया है, जबकि स्पीच प्रोसेसर को जल्द ही लगाया जाएगा जिन्हें जल्द ही स्पेशलिस्ट आकर लगाएंगे। सेहत विभाग की ओर से इस संबंध में सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह को प्रपोजल बनाकर भेजी गई थी, जिसे स्वीकार कर फंड जारी कर दिया गया है। ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. गुरबख्श सिंह ने बताया कि पहले केंद्र सरकार की ओर से एडिफ नामक योजना बनाई गई थी, जिसे 2022 में बंद कर दिया गया था। अमृतसर के ईएनटी अस्पताल में इस समय भी कॉकलियर इंप्लांट की सर्जरी की जा रही है। कॉकलियर इंप्लांट की कीमत लगभग 6 से 7 लाख रुपए है और निजी अस्पताल में प्री और पोस्ट सर्जरी के खर्च मिलाकर यह खर्चा करीब 9 से 10 लाख रुपए तक पहुंच जाता है। फिलहाल वेटिंग लिस्ट में बच्चों के परिजनों से संपर्क किया जा रहा है, ताकि उनके ऑपरेशन भी किए जा सकें। डॉ. गुरबख्श सिंह के मुताबिक यदि परिजनों को लगता है कि उनके बच्चे में सुनने और बोलने में कोई दिक्कत है, तो वे बच्चे को सीधे ईएनटी अस्पताल में लेकर आए। जहां उनके कुछ जरूरी टेस्ट किए जाएंगे। यदि टेस्ट में साफ हो जाता है कि बच्चे को सुनने और बोलने में दिक्कत है, तो उसके लिए आगे की कार्रवाई शुरू कर ऑपरेशन किया जाएगा। सरकारी मेडिकल कॉलेज या सरकारी अस्पतालों में 0 से 5 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के ऑपरेशन बिल्कुल नि:शुल्क किया जाएगा।
कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी पर 9 से 10 लाख रुपए तक का आता खर्च, अब परिजनों का आर्थिक बोझ होगा कम
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