Pakistan Army Chief Asim Munir & Shia Community Iran Controversy

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इस्लामाबाद7 मिनट पहले

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पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने गुरुवार को शिया धर्मगुरुओं से कहा कि जो लोग ईरान से इतना प्यार करते हैं, वे वहां चले जाएं। उनके इस बयान को शिया समुदाय के नेताओं ने अपमानजनक और भड़काऊ बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुनीर ने रावलपिंडी में शिया समुदाय की एक इफ्तार पार्टी में यह बात कही। उन्होंने कहा कि वे किसी को भी, किसी दूसरे देश के लिए अपनी वफादारी की वजह से, पाकिस्तान में अफरा-तफरी फैलाने की इजाजत नहीं देंगे।

इससे पहले उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि किसी दूसरे देश की घटनाओं के आधार पर पाकिस्तान में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस बयान के बाद शिया समुदाय का कहना है कि यह उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाने जैसा है। उनका मानना है कि यह बयान उनकी धार्मिक भावनाओं और पहचान को गलत तरीके से पेश करता है।

कराची में अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में 1 मार्च को प्रदर्शन हुए थे। इसमें आगजनी हुई थी, जिसे रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।

कराची में अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में 1 मार्च को प्रदर्शन हुए थे। इसमें आगजनी हुई थी, जिसे रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।

अचानक कार्यक्रम छोड़ गए मुनीर

रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक के बाद उलेमाओं से कहा गया था कि डिनर के बाद फिर से बातचीत होगी। लेकिन जनरल मुनीर अचानक कार्यक्रम छोड़कर चले गए। इससे शिया नेताओं को लगा कि उनके साथ न सिर्फ औपचारिक बल्कि व्यक्तिगत तौर पर भी अपमान किया गया है।

शिया समुदाय के नेताओं ने इस विवाद के बाद कहा कि उनकी वफादारी पाकिस्तान और इस्लाम दोनों के प्रति है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के निर्माण में शिया समुदाय का अहम योगदान रहा है। देश के कई बड़े नेता और संसाधन इस समुदाय से जुड़े रहे हैं।

शिया नेताओं का कहना है कि मक्का, मदीना, इराक और ईरान जैसे धार्मिक स्थलों से उनका जुड़ाव उनकी आस्था का हिस्सा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी देशभक्ति कम है। उन्होंने साफ कहा कि धार्मिक संबंधों को देशभक्ति से जोड़कर देखना गलत है।

पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शनों से मुनीर नाराज

शिया धर्मगुरुओं का कहना है कि मुनीर के बयान से ऐसा लगा कि वे ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में हुए विरोध प्रदर्शनों के लिए शिया समुदाय को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

बैठक में मौजूद शिया नेताओं ने कहा कि मुनीर ने गिलगित-बाल्टिस्तान में हुई अशांति को सीधे शिया लीडरशिप से जोड़ दिया और पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराया।

शिया धर्मगुरु मोहम्मद शिफा नजफी ने कहा कि उन्होंने वहीं पर मुनीर की बात का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सभी शियाओं को इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। सभी को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

नजफी ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की सेना में भी शिया मौजूद हैं और देश के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना भी शिया थे। उनके मुताबिक, जब उन्होंने यह बात उठाई तो मुनीर के रवैये में थोड़ा बदलाव आया, लेकिन फिर भी उन्होंने कहा कि “अगर आप ईरान से इतना प्यार करते हैं, तो वहां चले जाएं, दरवाजे खुले हैं।”

ईरान के विरोधियों से दोस्ती साध रहा पाकिस्तान

मुनीर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अपनी विदेश नीति में संतुलन बदलता हुआ दिख रहा है। पहले वह ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता था, लेकिन अब वह सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के करीब जाता दिख रहा है।

हालांकि, मुनीर के शिया समुदाय के साथ हुई इफ्तार पार्टी को लेकर पाकिस्तान सेना के आधिकारिक बयान में अलग तस्वीर पेश की गई। सेना ने कहा कि मुनीर ने धार्मिक नेताओं से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और सांप्रदायिक तनाव से बचने की अपील की।

पाकिस्तान में 15% शिया समुदाय की आबादी

पाकिस्तान में ईरान के बाद सबसे बड़ी शिया आबादी रहती है, जो कुल जनसंख्या का करीब 15 फीसदी (3.77 करोड़) मानी जाती है।

यह विवाद उस समय सामने आया है जब मार्च में खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

कराची में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी दूतावास परिसर में घुसने की कोशिश की, जहां अमेरिकी मरीन ने फायरिंग की और कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई।

इस्लामाबाद में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वहीं स्कार्दू में एक संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर को आग लगा दी गई। गिलगित-बाल्टिस्तान में भी कई लोगों की मौत की खबरें आईं। —————————————-

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