युद्ध से मेडिकल टूरिज्म ठप:राजधानी में 4-5 करोड़ रुपए महीने का इलाज कारोबार प्रभावित; हर माह 60+ मरीज आते थे, अब एक भी नहीं

Actionpunjab
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ईरान-इजराइल युद्ध ने जयपुर के मेडिकल टूरिज्म की रफ्तार पूरी तरह रोक दी है। खाड़ी देशों से हर महीने 60 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते थे, लेकिन पिछले दो महीनों में यह संख्या शून्य हो गई है। दुबई, कुवैत और यूएई सहित खाड़ी क्षेत्र में तनाव, फ्लाइट्स में कमी और बढ़े किराए का सीधा असर मरीजों की आवाजाही पर पड़ा है। युद्ध का असर जयपुर के बड़े अस्पतालों में साफ दिख रहा है। ईएचसीसी, फोर्टिस, नारायणा और जैन ईएनटी जैसे अस्पताल, जहां खाड़ी देशों के मरीजों की नियमित आमद रहती थी, अब खाली हैं। पिछले साल मार्च 2024 में 54 और मार्च 2025 में 62 मरीज इलाज के लिए जयपुर आए थे, लेकिन इस बार एक भी नहीं आया। जयपुर मेडिकल टूरिज्म के साथ-साथ मेडिकल कॉन्फ्रेंस और हेल्थ इवेंट्स का भी बड़ा केंद्र है। शहर के टूरिस्ट डेस्टिनेशन होने के कारण इलाज के साथ अन्य गतिविधियों के लिए भी हजारों लोग आते थे, लेकिन मौजूदा हालात में यह पूरी गतिविधि प्रभावित हो गई है। जयपुर के अस्पतालों का एशिया-अफ्रीका पर फोकस सबसे ज्यादा असर हार्ट, किडनी, लिवर ट्रांसप्लांट, जॉइंट रिप्लेसमेंट और ईएनटी सर्जरी पर पड़ा है। एक मरीज पर औसतन 6 से 8 लाख रुपए खर्च होते थे, जिससे हर महीने करीब 4 से 5 करोड़ रुपए का मेडिकल टूरिज्म जुड़ा हुआ था, जो अब पूरी तरह ठप है। अस्पताल संचालकों का मानना है कि युद्ध के खत्म होने के बाद भी हालात सामान्य होने में समय लगेगा और अगले 4 से 5 महीनों तक खाड़ी देशों से मरीज नहीं के बराबर आने की संभावना है। इस स्थिति में अस्पताल अब दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका और मध्य एशिया के देशों पर फोकस कर रहे हैं। कई अस्पतालों ने टेलीमेडिसिन सेवाएं शुरू कर दी हैं, ताकि मरीजों को पहले ऑनलाइन जोड़ा जा सके और बाद में जरूरत होने पर जयपुर लाया जा सके। एक्सपर्ट व्यूज – डॉ. अजीत बाना, डॉ. जितेन्द्र मक्कड़ (सीनियर कार्डियक सर्जन), डॉ. मुजाहिद सलीम व डॉ. विजय शर्मा (सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट), डॉ. सतीश जैन (सीनियर ईएनटी सर्जन),

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