SC Dismisses NHAI Petition on Land Acquisition Compensation

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नई दिल्ली14 घंटे पहले

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तस्वीर- फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar

तस्वीर- फाइल फोटो।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2019 से पहले हुए भूमि अधिग्रहण मामलों में सोलाटियम और ब्याज देने से जुड़े अपने फैसले पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। इससे किसानों और जमीन मालिकों को राहत मिली है।

चीफ जस्टिश सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के मामलों में सही मुआवजा मिलना संवैधानिक अधिकार है। इसे कमजोर नहीं किया जा सकता। इसे सरकार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से नहीं जोड़ा जा सकता।

पूरा मामला उन भूमि अधिग्रहण मामलों से जुड़ा है जो 2019 से पहले हुए थे, जिसमें प्रभावित लोगों को सोलाटियम और ब्याज देने का सवाल था। NHAI ने पहले के फैसले को चुनौती देते हुए पुनर्विचार याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए अपने पुराने फैसले को बरकरार रखा।

NHAI ने कहा था- ₹29 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमीन मालिकों को मिलने वाला ब्याज भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार 9% होगा, न कि NHAI एक्ट के 5% की सीमा के अनुसार। NHAI ने तर्क दिया था कि इससे उस पर करीब ₹29,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन कोर्ट ने इसे समीक्षा का आधार मानने से इनकार कर दिया।

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी मामलों को दोबारा नहीं खोला जा सकता। यानी 2018 से पहले के बंद मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा, लेकिन जो दावे पहले से लंबित हैं, उन पर कानून के अनुसार फैसला होगा। कोर्ट ने कहा कि जमीन मालिकों के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया की स्थिरता- दोनों के बीच संतुलन जरूरी है।

क्या है पूरा मामला?

NHAI ने अपनी पुनर्विचार याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 4 फरवरी 2025 के उस आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी, जिसमें यूनियन ऑफ इंडिया बनाम तरसेम सिंह (2019) के मुख्य फैसले पर स्पष्टीकरण मांगने वाली अर्जी को खारिज कर दिया गया था।

2019 के फैसले में कोर्ट ने NHAI एक्ट की धारा 3J को असंवैधानिक ठहराया था, क्योंकि यह भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों को लागू नहीं होने देती थी और इससे समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन होता था।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि 1997 (जब धारा 3J लागू हुई) से लेकर 2015 (जब 2013 का भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन कानून राष्ट्रीय राजमार्ग अधिग्रहण पर लागू हुआ) के बीच जिन जमीन मालिकों की जमीन अधिग्रहित हुई, वे भी उसी तरह के लाभ पाने के हकदार हैं, जैसे भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत अन्य मामलों में दिए जाते हैं।

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