नेपाल में बालेन शाह सबसे युवा प्रधानमंत्री बने:रैप गाकर दिया पहला मैसेज; मधेश क्षेत्र से आने वाले पहले PM

Actionpunjab
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नेपाल में शुक्रवार को बालेन्द्र (बालेन) शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 35 साल के बालेन देश के सबसे कम उम्र के पीएम बने। सांसद पद की शपथ के कुछ घंटे पहले उन्होंने रैप गाने के जरिए पहला संदेश जारी किया, जिसमें भ्रष्टाचार, सिस्टम बदलाव और युवाओं का जिक्र किया। उन्होंने अपने गीत में कहा कि एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और इस बार इतिहास बन रहा है। बालेन की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 5 मार्च के चुनाव में जीत दर्ज की थी। कार्यवाहक प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कहा कि देश का भविष्य अब युवाओं के हाथ में है और नई सरकार से भ्रष्टाचार खत्म करने की उम्मीद है। नई सरकार में मंत्रिमंडल का भी गठन शुरू हो गया है। सुधन गुरुंग को गृह मंत्री बनाया गया है, जिन पर देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी होगी। वहीं शिशिर खनाल को विदेश मंत्री बनाया गया है, जो नेपाल की कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संभालेंगे। बालेन शाह के शपथ ग्रहण से जुड़ी 3 तस्वीरें… मधेस क्षेत्र से आने वाले देश के पहले पीएम बालेन बालेन पहले काठमांडू के मेयर थे। पिछले साल दिसंबर में उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल हो गए थे। बालेन मधेस क्षेत्र से आने वाले पहले प्रधानमंत्री बने हैं। मधेश क्षेत्र नेपाल का वह इलाका है जो देश के दक्षिणी हिस्से में भारत की सीमा के साथ फैला हुआ है। इसे तराई क्षेत्र भी कहा जाता है। यहां रहने वाले लोगों को मधेशी कहा जाता है। नेपाल की राजनीति में यह इलाका लंबे समय से प्रतिनिधित्व और पहचान को लेकर चर्चा में रहा है, ऐसे में बालेन का प्रधानमंत्री बनना राजनीतिक संतुलन के नजरिये से भी अहम माना जा रहा है। दो-तिहाई बहुमत से जीती बालेन शाह की पार्टी नेपाल में आमतौर पर गठबंधन सरकारें बनती रही हैं, जहां दो या अधिक दल मिलकर बहुमत बनाते हैं। नेपाल में पिछले चुनावों में नेपाली कांग्रेस और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूनाइटेड मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के बीच मुख्य मुकाबला होता था। लेकिन इस बार स्थिति बदली। रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने अकेले बहुमत हासिल किया। 2022 में चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनी RSP को इस बार 275 में से 182 सीटें मिलीं। रैप बैटल जीतकर फेमस हुए बालेन नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह की कहानी पारंपरिक राजनीति से बिल्कुल अलग है। 1990 में काठमांडू के नरदेवी इलाके में जन्मे बालेन अपने माता-पिता के सबसे छोटे बेटे हैं। उनके पिता आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं, जबकि उनकी मां ने परिवार की देखभाल की। बालेन शादीशुदा हैं और अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहते हैं। उन्होंने काठमांडू से इंजीनियरिंग की डिग्री ली और बाद में कर्नाटक में उच्च शिक्षा हासिल की। 2013 में नेपाल की एक चर्चित रैप बैटल जीतकर उन्हें पहचान मिली। उनके गानों में उस युवा पीढ़ी की नाराजगी झलकती थी, जो खुद को व्यवस्था से अलग और नजरअंदाज महसूस करती थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ गाने गाकर पॉपुलर हुए इसके बाद बालेन ने कई गाने रिलीज किए, जिनमें भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता पर तीखा हमला था। उनका अलग लुक भी पहचान बन गया, काले रंग का चौकोर चश्मा, काला ब्लेजर और काली पैंट। उनका गाना ‘बलिदान’ खासा लोकप्रिय हुआ और इसे यूट्यूब पर 1.4 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। निर्दलीय जीता मेयर चुनाव राजनीति में उनकी एंट्री 2022 में हुई, जब उन्होंने काठमांडू मेयर का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़कर भारी मतों से जीत हासिल की। उन्होंने लंबे समय से सत्ता में रहे पारंपरिक दलों को हराया। बालेन का काठमांडू का मेयर बनना इसलिए बड़ी बात थी क्योंकि यह सिर्फ एक शहर का पद नहीं, बल्कि नेपाल की राजनीति का सबसे अहम शहरी पद माना जाता है। काठमांडू देश की राजधानी है, जहां से सरकार चलती है, बड़े फैसले होते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही शहर नेपाल की पहचान है। यही वजह है कि नेपाल में काठमांडू के मेयर की हैसियत कई केंद्रीय मंत्री से भी अधिक मानी जाती है। ऐसे में बालेन के निर्दलीय जीत की चर्चा सिर्फ नेपाल में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हुई। साल 2023 में टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के टॉप 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनकी प्रोफाइल स्टोरी की थी। GenZ प्रोटेस्ट में विरोध का चेहरा बने बालेन मेयर बनने के बाद उन्होंने शहर की सफाई, विरासत संरक्षण और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती के कदम उठाए। अवैध निर्माण पर कार्रवाई से ट्रैफिक सुधरा, हालांकि इसका विरोध भी हुआ, खासकर सड़क किनारे दुकानदारों और झुग्गी बस्तियों के लोगों से। बालेन शाह का प्रभाव केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रहा। पिछले साल सितंबर में हुए प्रदर्शनों के दौरान उनके गाने युवाओं के बीच गूंजते रहे। इन प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हुई थी और इसके पीछे सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और धीमी अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों का गुस्सा था। प्रदर्शनकारियों ने उनके गाने ‘नेपाल हंसेको’ को एक तरह का प्रतीक बना लिया। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में भी बालेन ने पारंपरिक प्रचार से अलग रणनीति अपनाई। वह मीडिया से दूर रहे और ज्यादा इंटरव्यू नहीं दिए। आलोचकों ने इसे पारदर्शिता से बचने की कोशिश बताया, लेकिन बालेन ने सोशल मीडिया के जरिए सीधे लोगों से संवाद किया। उन्होंने भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई, न्याय व्यवस्था में सुधार और 12 लाख नौकरियां देने जैसे वादे किए। उनकी यह रणनीति सफल रही और 5 मार्च को हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की, जिससे नेपाल की पारंपरिक राजनीति को बड़ा झटका लगा। बालेन शाह ने झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हराकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की। 35 साल की उम्र में प्रधानमंत्री पद संभालते ही वह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं।

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