पंजाब के मलेरकोटला में 2 आतंकी गिरफ्तार:पंजाब और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दबोचा, 5 साल से गांव शेरवानी कोटे में करते थे मजदूरी

Actionpunjab
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पंजाब के मलेरकोटला से पंजाब पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों की पहचान अब्बू गाबा और उस्मान के रूप में हुई है। इन्हें शेरवानी कोटे गांव से शनिवार को गिरफ्तार किया गया जहां वे पिछले कई वर्षों से किरायेदार के रूप में रह रहे थे। इसके साथ ही 5 साल से मजदूरी भी कर रहे थे। नशा तस्कर से पूछताछ में मिला सुराग
इस मामले में बड़ा खुलासा उस समय हुआ जब “युद्ध नशे के विरुद्ध” अभियान के तहत पकड़े गए एक स्थानीय नशा तस्कर से पूछताछ की गई। जांच के दौरान सामने आए इनपुट के आधार पर दोनों संदिग्धों की पहचान जम्मू-कश्मीर में वांछित आतंकियों से मेल खाती पाई गई। मलेरकोटला पुलिस की CIA विंग की टीम ने शनिवार को गांव में छापा मारकर दोनों को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उन्हें आगे की जांच के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस के हवाले कर दिया गया है। फिलहाल इस मामले में पंजाब पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। 15 साल से रह रहे थे दोनों पाकिस्तानी
बताया जा रहा है कि दोनों मलेरकोटला में पिछले 15 वर्ष से रह रहे थे। दोनों पाकिस्तानी है। गांव शरेवानी कोट के सरपंच सिमरनजीत सिंह ने दोनों को शनिवार को पुलिस के सीआइए स्टाफ की टीम ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ घर में दबिश देकर दोनों को पकड़ा। सिमरनजीत ने बताया कि दोनों करीब पांच साल से उनके गांव में ही रहकर मजदूरी करते थे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि दोनों करीब 15 वर्ष से जिले के अलग-अलग गांवों में रह रहे थे। दोनों खुद को जम्मू-कश्मीर के रहने वाले बताते थे और वे स्थानीय लोगों से घुलमिल चुके थे। दोनों पाकिस्तानी हैं, किसी को कभी उन पर संदेह नहीं हुआ। 11 मई 2025 को मां-बेटी को भी पकड़ा था जासूसी करते
मलेरकोटला से पाकिस्तानी आतंकी पकड़े जाने की यह पहली घटना है। हालांकि इससे पहले 11 मई 2025 में पुलिस ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में बाप-बेटी को गिरफ्तार किया था। 31 वर्षीय गुजाला अपने पिता यामीन मोहम्मद के साथ सेना व अन्य बड़े प्रतिष्ठानों की जानकारी पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी अब्दुल्ला तक पहुंचाने का काम करते थे।
इसके बदले में उन्हें पैसे दिए जाते थे। पुलिस ने दोनों को डिजिटल सुबूत के साथ गिरफ्तार किया था। वहीं, पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात अधिकारी को देश से निष्कासित कर दिया गया था।

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