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अथर्ववेद कर्ज को मानसिक और आध्यात्मिक बोझ मानता है। इसके उलट राजस्थानी अपनी जरूरतों को टालने के बजाय कर्ज लेना बेहतर समझ रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेश के 83 साल के बैंकिंग इतिहास में पहली बार बैंकों की कुल जमा के मुकाबले बांटा गया कर्ज ज्यादा हो गया। यानी ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) 100.7% तक पहुंच गया। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में बैंकों की जमा राशि 10.80% बढ़कर 8.05 लाख करोड़ और बांटा गया कर्ज 13.16% बढ़कर 8.10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। एक साल में बैंकों की जमा 78,502.22 करोड़ और कर्ज 94,274.62 करोड़ रुपए बढ़ा है। जबकि 31 दिसंबर 2024 तक बैंकों की कुल जमा 7 लाख 26 हजार 691.26 करोड़ और कर्ज 7 लाख 16 हजार 518.17 करोड़ रुपए था, यानी सीडी रेशियो 98.60% था। सरकारी बैंक शहरों में, जबकि निजी और स्मॉल फाइनेंस बैंक (एसएफबी) ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ज्यादा कर्ज दे रहे हैं। सितंबर 2025 तक राजस्थान देश में प्रति व्यक्ति जमा, कर्ज और आय के लिहाज से 13वें स्थान पर था। राजस्थान में प्रति व्यक्ति जमा 86,383 और कर्ज 78,023 रुपए था, जबकि प्रचलित कीमतों पर आय 1 लाख 85,053 रुपए थी। सरकारी बैंक शहर, निजी ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा कर्ज दे रहे सरकारी बैंकों ने ग्रामीण क्षेत्र में जमा के मुकाबले कम लोन दिए, लेकिन निजी बैंकों ने जमा की तुलना में 1.8 गुना लोन दिया है। सहकारी बैंकों ने जमा के मुकाबले 1.25 गुना लोन दिया। अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सरकारी बैंकों ने जमा के अनुपात में सबसे कम 69.98% ऋण दिया। निजी बैंकों ने जमा का दोगुना लोन दिया। शहरी क्षेत्रों में सरकारी बैंकों ने ज्यादा लोन बांटे हैं। निजी बैंकों ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के मुकाबले शहरों में कम कर्ज दिया। सहकारी बैंकों ने पहली बार जमा से अधिक कर्ज दिया। बैंक आरबीआई से उधार लेकर लोन देते हैं – आंकड़े: राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति 100% सीडी रेशियो विकास के हिसाब से अच्छा, लेकिन लोन महंगा हो सकता है प्रदेश में कृषि इकाइयों, छोटे व्यापार और पर्यटन सेक्टर में लोन बढ़ा है। इससे सीडी रेशियो 100% से ऊपर निकल गया। यह विकास के लिहाज से सकारात्मक है, लेकिन जोखिम प्रबंधन प्रभावी करने की जरूरत है, अन्यथा बैंकों का एनपीए बढ़ सकता है। सीडी रेशियो दोधारी तलवार है। मसलन, सीडी रेशियो बढ़ना व्यापार, खेती और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए धन की भारी मांग के रूप में देखा जा सकता है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। वहीं, खराब पहलू यह है कि बैंक जमा से ज्यादा कर्ज देंगे, तो अचानक पैसा निकालने वालों के लिए बैंकों के पास नकदी की कमी हो सकती है। फंड की कमी होने पर बैंक नई जमा राशि जुटाने के लिए ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। इससे लोन महंगा हो सकता है। 70 से 75 सीडी रेशियो आदर्श होता है आरबीआई के अनुसार। भास्कर एक्सपर्ट – लोकेश झालानी, बैंकिंग मामलों के जानकार और किशनपोल बाजार व्यापार मंडल के सचिव
राजस्थान में जमा से ज्यादा कर्ज:83 साल में प्रदेश में पहली बार सीडी रेशियो 100 प्रतिशत पार; कर्ज 13.16 फीसदी बढ़ा
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