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उदयपुर शहर का सबसे व्यस्त उदियापोल चौराहा गुरुवार रात एक अनोखे रेस्क्यू ऑपरेशन का गवाह बना। आमतौर पर जब शहरों में पुल या सड़कें बनती हैं, तब सबसे पहले पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलती है। लेकिन उदयपुर नगर निगम ने एक नई मिसाल पेश की है। निगम की स्मार्ट प्लानिंग के चलते 15 साल पुराने करीब 40 पेड़ों को कटने से बचा लिया गया। इन पेड़ों को उखाड़ा नहीं गया, बल्कि उन्हें नई जगह नगर निगम के ही गार्डन में लगाने के लिए शिफ्ट किया जा रहा है। रात के 11 बज रहे थे, जब पूरा शहर नींद के आगोश में जाने की तैयारी कर रहा था, तब उदियापोल चौराहे पर हलचल बढ़ गई। बड़ी-बड़ी क्रेन, जेसीबी और ट्रेलर वहां तैनात थे। नगर निगम के कमिश्नर अभिषेक खन्ना खुद आधी रात तक मौके पर डटे रहे। खन्ना की निगरानी में इन पेड़ों को जड़ों समेत निकालने का काम शुरू हुआ। यह कोई मामूली काम नहीं था, क्योंकि इन पेड़ों को यहां से करीब एक किलोमीटर दूर निगम के बगीचे में सुरक्षित शिफ्ट करना था। पहले देखिए रेस्क्यू से जुड़ी 4 फोटो… गार्डन की सुंदरता बढ़ाएंगे दरअसल, उदयपुर में सिटी रेलवे स्टेशन से कलेक्टर बंगले तक 136 करोड़ की लागत से 2.7 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड का काम तेजी से चल रहा है। उदियापोल चौराहे के ठीक बीच में रोड के पिलर बनने हैं। 117 पिलर्स पर यह रोड बनेगा। ऐसे में वहां खड़े पेड़ों को हटाना मजबूरी थी। नगर निगम चाहता तो इन पेड़ों को चंद घंटों में काटकर रास्ता साफ कर देता, लेकिन उन्होंने पेड़ों को नई जिंदगी देने का फैसला किया। इनमें ज्यादातर ‘पाम-ट्री’ हैं, जो चौराहे की शान बढ़ा रहे थे। अब ये पेड़ नगर निगम के नेहरू बाल उद्यान की सुंदरता बढ़ाएंगे। गुरुवार रात 6 पेड़ों को नेहरू बाल उद्यान में शिफ्ट किया गया। पूरे मिशन का गणित समझिए जिन 40 पेड़ों को बचाया जा रहा है, उनमें से कई की कीमत बाजार में 2 लाख रुपए तक है। अगर इन सभी पेड़ों की कुल वैल्यू देखें तो यह 60 लाख रुपए से ज्यादा है। निगम ने सूझबूझ दिखाई और महज सवा लाख रुपए के खर्चे में इन लाखों के कीमती पेड़ों को बचा लिया। इन पेड़ों की शिफ्टिंग का काम अभी दो-तीन दिन तक लगातार चलेगा, ताकि एक भी पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचे। डॉ. बीएल चौधरी इस पूरे ऑपरेशन के असली हीरो डॉ. बीएल चौधरी हैं। इन्हें पेड़ों का जादूगर कहा जाता है, जो अब तक देश-दुनिया में 15 हजार से ज्यादा पेड़ों को नई जिंदगी दे चुके हैं। उनकी देखरेख में एमएम एग्रोटेक की टीम ने बड़े ही वैज्ञानिक तरीके से खुदाई की। सबसे पहले पेड़ों के चारों तरफ तीन से चार फीट गहरा खड्डा खोदा गया। कोशिश यह थी कि पेड़ की जड़ें और उनके साथ लगी मिट्टी सुरक्षित रहे। जब पेड़ अपनी मिट्टी के साथ पूरी तरह ढीला हो गया, तो क्रेन की मदद से उसे बहुत धीरे से उठाकर ट्रेलर पर लिटाया गया। इन ऊंचे-ऊंचे पेड़ों को ट्रेलर में भरकर ले जाना किसी फिल्म के सीन जैसा लग रहा था। मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ यह सब देखकर हैरान थी। लोग खुश थे कि विकास की दौड़ में हरियाली की बलि नहीं दी जा रही है। निगम के गार्डन में इन पेड़ों के लिए घर पहले से तैयार था। वहां सात-आठ फीट गहरे और चौड़े गड्ढे खोदकर उनमें खाद-मिट्टी डाल दी गई थी। जैसे ही पेड़ वहां पहुंचे, उन्हें क्रेन से उतारकर सीधे नए गड्ढों में शिफ्ट कर दिया गया। पर्यावरण को बचाना जरूरी निगम कमिश्नर अभिषेक खन्ना ने बताया कि शहर के किसी भी निर्माण कार्य में पेड़ों को कम से कम नुकसान हो यह कोशिश हमेशा रहती है। उदियापोल के ये 15 साल पुराने पेड़ शहर की विरासत जैसे हैं। उदयपुर जैसे शहर के लिए पर्यावरण को बचाना बहुत जरूरी है।
उदयपुर में 40 पेड़ों को बचाने आधी रात चला रेस्क्यू:एलिवेटेड रोड के लिए कटने वाले थे; एक्सपर्ट्स की मदद से नेहरू बाल उद्यान में शिफ्टिंग शुरू
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