नामधारी संप्रदाय की माता चंद कौर की हत्या के मामले में सीबीआई द्वारा केस नामजद किए गए ठाकुर दिलीप सिंह को सीबीआई की विशेषअदालत ने भगोड़ा घोषित किया गया । अदालत ने रिकॉर्ड की जांच के बाद साफ कहा कि ठाकुर दलीप सिंह 2015 के कार बम धमाके से लेकर कई हत्याओ
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अदालत ने ऐसे बताया मामले में आरोपी
अदालत ने रिकॉर्ड से जोड़ा कि यह पूरा मामला 2012 में भैणी साहिब के सद्गुरु जगजीत सिंह जी की मृत्यु के बाद शुरू हुआ। उस समय किसी को उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया गया था। सदगुरु ठाकुर उदय सिंह और ठाकुर दलीप सिंह दोनों मुख्य दावेदार थे। जब ठाकुर उदय सिंह को संप्रदाय की गद्दी सौंपी गई, तो ठाकुर दलीप सिंह ने इसका खुला विरोध किया। CBI के अनुसार, दिसंबर 2015 में ठाकुर दलीप सिंह ने ठाकुर उदय सिंह और उनकी माता चंद कौर के दामाद जगतार सिंह को टिफिन बम से मारने की साजिश रची। CBI ने उसे इस हमले का मास्टरमाइंड बताया है।
ड्राइवर की गवाही से दबली कहानी
4 अप्रैल 2016 को माता चंद कौर की भैणी साहिब में अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी। माता चंद कौर ने सदगुरु ठाकुर उदय सिंह को संप्रदाय का नया मुखिया घोषित किया था। इसके कुछ समय बाद नामधारी अवतार सिंह की भी हत्या कर दी गई। इन सभी मामलों में ठाकुर दलीप सिंह पर आरोप लगे। 2017 में पंजाब पुलिस ने ये सभी मामले CBI को सौंप दिए और केस नंबर 3/17 दर्ज किया गया। 2018 में ठाकुर दलीप सिंह के ड्राइवर ने पूरे साजिश का खुलासा किया। उसे विदेश से भारत लाया गया और उसकी गवाही ने मामले को नया मोड़ दिया।

रेड कॉर्नर नोटिस भी जाीर
अदालत के आदेश के अनुसार, 4 दिसंबर 2015 को हुई कार बम विस्फोट की घटना के तुरंत बाद FIR दर्ज की गई थी। जांच के दौरान मुलजिम नंबर-7 ठाकुर दलीप सिंह को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। CBI के मुताबिक वह विदेश फरार हो गया था।
13 मई 2021 को उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए, लेकिन भारत में उसकी गैर-मौजूदगी के कारण वारंट लागू नहीं हो सके। इसके बाद 11 जून 2021 को CBI ने लुक आउट नोटिस जारी किया, जिसे बार-बार नवीनीकृत किया जाता रहा।
31 दिसंबर 2022 को उसकी गैर-मौजूदगी में ही चार्जशीट दायर कर दी गई। 4 दिसंबर 2023 को इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया, फिर भी उसका सही ठिकाना अब तक नहीं मिल सका।