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नमस्कार सीकर में गवर्नर साहब को शहनाई की स्वर लहरियों के बीच ही गार्ड ऑफ ऑनर दे दिया गया। मंत्रीजी की बिटिया की शादी में पूनियाजी ने जनसुनवाई भी कर दी और डीग में एसपी सर ने स्कूल के बच्चों से जीप वाला किस्सा शेयर किया। क्रिकेट के बल्ले से खूब जौहर भी दिखाया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. शहनाई के बीच ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ सीकर का छोटा सा गांव है भारणी। मंत्रीजी ने बिटिया की शादी गांव से की। कई बीघा में टेंट का आलीशान महल खड़ा हुआ। जैसे रेगिस्तान में नखलिस्तान। कालीन पर कारें चलकर पहुंचीं। एक से बढ़कर एक VVIP आए। अपने भी आए और दूसरे दलों के भी आए। जो आए उन्होंने रीलें बनवाई। अगवानी करने खुद मंत्रीजी पहुंच रहे थे। सुरक्षा में जवानों की ‘फौज’। इस बीच काली कार में गवर्नर महोदय पहुंच गए। वातावरण में शहनाइयों की स्वर लहरियां बिखरी हुईं थीं। अचानक बिगुल फूंकने की ध्वनि उठी और सभी लोग सावधान की पोजिशन में खड़े हो गए। एक गेस्ट ने दूसरे से पूछा-क्या हो रहा है भाईसाब? दूसरा बोला-गवर्नर साहब को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा रहा है। शादी में भी प्रोटोकॉल फुल रहा। 2. शादी में पूनियाजी की ‘जनसुनवाई’ पूरा कैबिनेट VVIP शादी में मेल-मुलाकात में व्यस्त। बधाइयां ली जा रही थीं। बधाइयां दी जा रही थी। व्यवस्थाओं का अवलोकन किया जा रहा था। कोई टेंट व्यवस्थापकों को कॉन्टेक्ट नंबर ले रहा था किसी को कैटरिंग क्षेत्र का दौरा करना था। शादी में बड़े-बड़े दिग्गज पहुंचे थे, लिहाजा सिक्योरिटी भी टाइट होनी ही थी। खाकी पूरी तरह मुस्तैद थी। शादी किसी भी मायने में रॉयल वेडिंग से कम नहीं। पूनियाजी भी पहुंचे थे। आगे बढ़कर मंत्रीजी ने उनकी अगवानी की थी। इसी शादी में सीताराम जी भी आए हुए थे। सीताराम जी कोई VVIP नहीं। स्थानीय ग्रामीण ही थे। सीताराम जी का ध्यान न भव्य कालीन की तरफ जा रहा था, न शानदार महलनुमां टेंट की तरफ, न पाकशाला की सुगंधि पर और न लग्जरी कारों आगमन-प्रस्थान पर। सीताराम जी दिमाग में तो खोई हुई बकरियां ही घूम रही थी, जिन्हें पुलिस कई बार शिकायत करने पर भी तलाश नहीं पाई थी। सीताराम जी ‘मत चूके चौहान’ की नजर से अपनी समस्या बताने को किसी ‘हस्ती’ को ढूंढ रहे थे। तभी पूनियाजी पर नजर पड़ी। बेहिचक बकरियों वाली बात बता दी। पूनियाजी ने भी टकराया नहीं। संबंधित थाने में फोन घुमाया और आदेश के लहजे में कहा कि इनकी मदद करनी है। सीतारामजी की जान में जान आई। अब उन्हें सब कुछ ‘भव्य’ लगने लगा। 3. SP साहब और ‘दो-दो हाथ’ डीग के एसपी साहब एक स्कूल में पहुंचे। उन्हें लेकर यह बात प्रचलित है कि वे महाराष्ट्र के सोलापुर के छोटे से गांव से हैं। बचपन संघर्षों में बीता। साहब जब भी बच्चों के बीच जाते हैं तो अपने संघर्ष को जरूर याद करते हैं। फिर बच्चों को बचपन के संस्मरण सुनाकर उन्हें अच्छा करने की सीख देते हैं। तो एसपी साहब ने स्कूल के मंच से माइक संभाला। बोले- हमारे गांव से स्कूल 10 किलोमीटर दूर शहर में था। गांव के बाहर जीपें लगती थी। जीप भर जाती तो खिसकती। सीट पर बैठने वालों से 10 रुपया लिया जाता। जो लटक कर या छत पर चढ़कर जाते उनका 5 रुपए में काम चल जाता। मैंने 95 फीसदी सफर जीप पर लटककर या छत पर बैठकर ही किया। बच्चे पनीली आंखों से एसपी साहब का चेहरा देख रहे थे। इतने बड़े पद पर साहब कैसे पहुंचे? सीधा जवाब- चुनौतियों से दो-दो हाथ करके। हाल ही पहाड़ी पुलिस लाइन का दौरा करने एसपी साहब पहुंचे तो जवानों को किक्रेट खेलते देखा। खुद को रोक नहीं सके। बल्ला लेकर पिच पर पहुंचे। यहां भी खूब हाथ खोले। जवान भी मारक-क्षमता देख हैरान। ग्राउंड के बाहर से चिल्लाते रहे- वेरी गुड सर। इनपुट सहयोग- मुकेश कुमार जांगिड़ (डीग)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी।
शहनाई के बीच 'गार्ड ऑफ ऑनर':शादी में पूनियाजी की 'जन-सुनवाई'; SP साहब का 'जीप वाला किस्सा'
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