Ujjain Sanyas Controversy | Anil Anands 900 Mice Remark

Actionpunjab
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महाकुंभ 2024 से सुर्खियों में आई हर्षा रिछारिया अब स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। वे आधिकारिक रूप से संन्यास ले चुकी हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। हालांकि, उनके संन्यास पर मध्य

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महाराज अनिलानंद ने कहा- यह पूरा घटनाक्रम गलत और सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती। प्रयागराज कुंभ के दौरान हर्षा ने संन्यास लेने का दावा किया, लेकिन बाद में सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। ऐसे व्यक्ति का संन्यास लेना स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि हर्षा को दीक्षा दिलाने वाले सुमनानंदजी महाराज की जांच हो।

यह संन्यास नहीं, परंपरा का अपमान

महाराज अनिलानंद ने कहा- हर्षा रिछारिया पहले भी धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित रुख अपना चुकी हैं। ऐसे आचरण वाले व्यक्ति का संन्यास लेना संदेह पैदा करता है। संन्यास एक पवित्र और अनुशासित परंपरा है, जिसे कोई भी व्यक्ति अचानक नहीं अपना सकता।

उन्होंने कहा- जो लोग पहले अलग जीवन जीते रहे, वे अचानक संन्यास लेकर सम्मान की अपेक्षा नहीं कर सकते। यह हमारे सनातन धर्म के लिए घोर अपमान की बात है।

संन्यास लेने के बाद हर्षानंद गिरि ने गुरु के दर्शन किए।

संन्यास लेने के बाद हर्षानंद गिरि ने गुरु के दर्शन किए।

अखाड़ा परिषद से कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने अखाड़ा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा- जो लोग सनातन धर्म को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने हर्षा रिछारिया को संन्यास दिलाने वाले महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज की भूमिका पर भी सवाल उठाए। दीक्षा दिलाने की जांच की मांग भी की। कहा कि संन्यास एक गहन और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसे बचपन से साधना और अनुशासन के साथ अपनाया जाता है। संन्यास लेने वाले को वर्षों तक कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है।

महाराज अनिलानंद ने हर्षा रिछारिया को संन्यास दिलाने की जांच कराने की मांग की है।

महाराज अनिलानंद ने हर्षा रिछारिया को संन्यास दिलाने की जांच कराने की मांग की है।

इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जाए

अनिलानंद महाराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि उज्जैन में आगामी धार्मिक आयोजनों के मद्देनजर इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सनातन परंपरा से छेड़छाड़ की गई, तो कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

इससे पहले स्वामी हर्षानंद गिरि ने संन्यास को अपने जीवन का नया अध्याय बताया था। उन्होंने कहा था कि गुरुदेव के मार्गदर्शन में उन्होंने आध्यात्मिक जीवन का मार्ग चुना है और आगे धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहेंगी।

संन्यास के बाद हर्षा रिछारिया अब स्वामी हर्षानंद गिरि कहलाएंगी।

संन्यास के बाद हर्षा रिछारिया अब स्वामी हर्षानंद गिरि कहलाएंगी।

कुंभ में संतों के साथ रथ पर बैठी थीं

4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई निकली थी। उस वक्त 30 साल की मॉडल हर्षा रिछारिया संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आई थीं। पेशवाई के दौरान हर्षा रिछारिया से पत्रकारों ने साध्वी बनने पर सवाल किया था।

इस पर हर्षा ने कहा था- मैंने सुकून की तलाश में यह जीवन चुना है। मैंने वह सब छोड़ दिया, जो मुझे आकर्षित करता था। इसके बाद हर्षा सुर्खियों में आ गईं। मीडिया चैनल ने उन्हें ‘सुंदर साध्वी’ का नाम भी दे दिया।

इस पर हर्षा फिर से मीडिया के सामने आईं। कहा- मैं साध्वी नहीं हूं। मैं केवल दीक्षा ग्रहण कर रही हूं।

पिता बस कंडक्टर, मां बुटिक चलाती हैं

हर्षा रिछारिया का परिवार उत्तर प्रदेश के झांसी का रहने वाला है। उनके पिता दिनेश रिछारिया बस कंडक्टर हैं, मां किरण बुटिक चलाती हैं। एक भाई कपिल है, जो प्राइवेट जॉब करता है। फिलहाल, पूरा परिवार भोपाल में रहता है।

हर्षा स्टेज एंकर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रही हैं। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनके अच्छे-खासे फॉलोअर्स हैं। वे सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े वीडियो बनाती थीं। ग्रेजुएट हैं और अहमदाबाद से योग स्पेशल कोर्स कर रखा है। वे निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या हैं।

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