Mamata Banerjee TMC I-PAC Office ED Raid Case Update

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नई दिल्ली/कोलकाता8 घंटे पहले

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कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर ED रेड के दौरान ममता पहुंच गई थीं। - Dainik Bhaskar

कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर ED रेड के दौरान ममता पहुंच गई थीं।

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन I-PAC रेड मामले पर ED की याचिका पर सुनवाई हुई। ED अफसरों की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि ED अफसरों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है।

ED ने कहा- ‘रूल ऑफ लॉ’ समानता के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। जब ‘रूल ऑफ लॉ’ का उल्लंघन होता है, तो एजेंसी और उसके अधिकारी व्यक्तिगत और आधिकारिक अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

इस पर जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा- अगर हम इस तरह की याचिकाएं सुनते रहे, तो खतरा है। यह कोर्ट अनुच्छेद 32 की याचिकाओं से भर जाएगा। क्या हमें इसे बढ़ावा देना चाहिए या खारिज करना चाहिए?

ED ने कहा, ‘कोलकाता में ED अफसरों को रोका गया, बंधक बनाया गया। उनके खिलाफ व्यक्तिगत अपराध हुए हैं। वे पीड़ित हैं।’ इस पर कोर्ट ने पूछा- अगर ED अधिकारियों के व्यक्तिगत अधिकार हैं, तो क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के व्यक्तिगत अधिकार नहीं हैं?

ममता पर रेड के दौरान फाइलें-डिवाइस ले जाने का आरोप

ED इस साल 8 जनवरी को पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी I-PAC दफ्तर और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर और दफ्तर पर रेड करने पहुंची थी। यह कंपनी बंगाल में TMC का चुनावी कैंपेन संभालती है। I-PAC का TMC से 2019 लोकसभा चुनाव से जुड़ाव रहा है।

रेड के दौरान ममता और बंगाल पुलिस के कई अधिकारी वहां पहुंचे। आरोप है कि ममता वहां से कई फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अपने साथ ले गईं। ममता ने कहा कि उन फाइलों में उनकी राजनीतिक पार्टी से जुड़ी जानकारी थी।

दूसरी ओर, ED का कहना है कि ये छापे 2020 के मनी लॉन्ड्रिंग केस के तहत किए जा रहे थे। एजेंसी की याचिका के अनुसार, ममता की दखल के कारण जांच से जुड़े जरूरी फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक सबूत वहां से हटा दिए गए।

22 अप्रैल: SC बोला- जांच में ममता का दखल लोकतंत्र को खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा था कि जब कोई मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय एजेंसी की चल रही जांच में दखल देता है, तो इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच का विवाद नहीं कहा जा सकता।

ममता की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें रखीं। उन्होंने कहा- ED को जांच करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। यह सिर्फ उनका काम है, अधिकार नहीं।

सिंघवी ने कहा- ED का अधिकारी जब काम कर रहा है, तो वह सिर्फ ‘सरकारी कर्मचारी’ है। वह अपने विभाग से अलग किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकता। पूरी खबर पढ़ें…

I-PAC डायरेक्टर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

इधर, दिल्ली की एक कोर्ट ने गुरुवार को I-PAC के को-संस्थापक और डायरेक्टर विनेश चंदेल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ED ने चंदेल को 10 दिन की हिरासत पूरी होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया था।

14 अप्रैल को कोर्ट ने ED को चंदेल से 10 दिन तक पूछताछ की इजाजत दी थी। ED ने 13 अप्रैल को चंदेल को इस मामले में पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। चंदेल पेशे से वकील हैं, I-PAC में 33% हिस्सेदारी रखते हैं।

I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस

I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। इसमें कारोबारी अनूप मजी पर कोयला तस्करी में शामिल होने का आरोप है। ED के मुताबिक, मजी के नेतृत्व में एक कोयला तस्करी गिरोह बंगाल में ईसीएल (Eastern Coalfields Limited) के इलाकों से कोयला चोरी और अवैध खनन करता था और उसे विभिन्न फैक्ट्रियों/प्लांट्स में बेचता था।

एजेंसी का आरोप है कि इस कोयले का बड़ा हिस्सा शकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनियों को बेचा गया। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी।

तस्वीर 8 जनवरी, 2026 की है, जब ममता ने ED रेड के बीच मीडिया को संबोधित किया था।

तस्वीर 8 जनवरी, 2026 की है, जब ममता ने ED रेड के बीच मीडिया को संबोधित किया था।

ऐसे समझें… तृणमूल के लिए I-PAC इतनी जरूरी क्यों

  • 2021 के चुनाव में: ममता के लिए I-PAC ने रणनीति बनाई। उन्होंने फर्म को संगठन का काम दिया। प्रत्याशी चयन, बूथ लेवल मैनेजमेंट, भाषण, सोशल पोस्ट, पोस्टर, नारे सब कुछ I-PAC ही कर रही थी।
  • इस चुनाव में: टीएमसी डेटा पर फोकस कर रही है। 2021 विस और 2024 लोकसभा चुनाव के बूथ स्तरीय आंकड़ों का विश्लेषण I-PAC ने ही किया।
  • हर सीट को 3 कैटेगरी में बांटा: मजबूत, कमजोर और लो वोट मार्जिन। 15 हजार तक मार्जिन की सीटें चुनीं।
  • टीम एसआईआर को भी ट्रैक कर रही है: पार्टी का मानना है कि वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटने से गणित बिगड़ सकता है, इसलिए शैडो एजेंट्स लाए गए।
  • ये एजेंट्स नाम कटने वाले वोटरों तक पहुंचे: उनसे फार्म भरवाए, री-एंट्री करवाई। बीएलओ को ट्रैक करना, वोटर लिस्ट की गड़बड़ी पकड़ना, फील्ड से रियल टाइम इनपुट देना, ये काम शैडो एजेंट्स ही कर रहे थे।
  • हर सीट पर अलग वॉर रूम है: जहां 20 सदस्यीय टीम काम करती है। छोटी बैठकें अरेंज करती है।

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