![]()
नमस्कार गर्मी से कई तरह के रोग हो सकते हैं। हेल्थ डिपार्टमेंट एडवाइजरी जारी कर रहा है। लेकिन ये कहना भूल गया कि धूप से बचने के लिए किसी भी बर्तन में सिर नहीं डालना है। बीजेपी संगठन के मुखियाजी ने गहलोत साहब का पुराना जख्म कुरेद दिया और शिक्षा मंत्रीजी ने बच्चे से ‘बहुमत’ वाला सवाल पूछ लिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. शिक्षा मंत्रीजी का ‘बहुमत’ वाला सवाल भारतीय जनता पार्टी गणित की विशेषज्ञ पार्टी है। दिल्ली में ‘उधर’ से 7 घटाकर ‘इधर’ जोड़ लिए गए। पार्टी चाहती है कि देश का बच्चा-बच्चा गणित में माहिर हो। इसी चाह के साथ शिक्षामंत्रीजी श्रीगंगानगर पहुंचे। वहां एक सरकारी स्कूल में पहुंचे। 8वीं क्लास का बच्चा सामने था। शिक्षा मंत्रीजी ने सवाल पूछा- 49 में 2 जोड़ेंगे तो कितने होंगे? हालांकि, जवाब इतना आसान था कि कच्ची पहली क्लास का बच्चा भी तुरंत जवाब दे देता। लेकिन छात्र कुछ सेकेंड खामोश रहा। उसका दिमाग घूमने लगा। वह मन ही मन सोचने लगा- मंत्रीजी कहीं बहुमत की परीक्षा तो नहीं ले रहे हैं? क्योंकि 49 में 2 जुड़ते ही मामला अल्पमत से बहुमत में बदल जाएगा। जब बहुमत ही लाना है तो कगार पर क्यों? कम से कम 60 तक तो पहुंचना चाहिए। कगार का बहुमत दुखदायी। पता नहीं कब कौन किधर खिसक जाए। काफी देर सोचकर छात्र बोला- 49 में 2 जुड़ेंगे तो 60 हो जाएंगे। इस मामले को छात्र की कमजोरी और शिक्षकों की लापरवाही से जोड़कर देखा गया। टीचर्स को फटकार लगाई गई। मंत्रीजी दूसरी परीक्षा लेने लगे। छात्रा से कहा- लिखो, श्रीराम। 2. ‘मधुर मिलन’ के बाद ‘वार-पलटवार’ दिल्ली में दो दिग्गजों का मधुर मिलन हुआ। हाथ मिले। हंसी मजाक हुआ। अनबन का सवाल उठाने वालों को उलाहना दिया गया। इसके बाद भाजपा संगठन के मुखिया ने इस मिलन पर अपनी राय रख दी। बोले- जो लोग फोटो खिंचवा कर कहें कि हम साथ हैं तो सोचिए उनमें कितना मतभेद होगा। साथ साबित करने के लिए फोटो खिंचवाना ये साबित करता है कि अन्तरद्वन्द तो है। कोई किसी को नालायक, नाकारा, निकम्मा कह दे तो कोई कैसे भूल सकता है? जिंदगी भर नहीं भूल सकता। उनमें कोई साथ नहीं है, वे स्वांग करते हैं। नाटक करते हैं। बात पूर्व मुख्यमंत्रीजी तक पहुंच गई। उन्होंने तुरंत पलटवार किया। बोले- बार बार ये हमारे ऊपर बोलते हैं। वे चाहते हैं कि मैं पायलट का नाम लूं कि ये लोग मानेसर गए थे। ये लोग चाहते हैं कि नाम लेते ही हमारी लड़ाइयां हो शुरू जाएं। हम तो एक जुट हैं। उन्होंने हमें तोड़ने में कोई कमी छोड़ी क्या? 3. धूप से बचने के चक्कर में अलवर में बहुत तेज गर्मी पड़ रही है। सीधी धूप सिर पर पड़े तो जैसे आग का ठीकरा लेकर आदमी चल रहा हो। अकबरपुर में माधोगढ़ के कालूराम को भी भयंकर धूप लग रही थी। लेकिन क्या करे। खेती का काम। धूप में तो निकलना ही पड़ेगा। धूप से बचने का कोई उपाय नहीं। बस दूध का खाली ढोल है। कालूराम के दिमाग की बत्ती जली। उसने सोचा ढोल में अंदर तरावट है। धूप से बचने के लिए क्यों न इसी को ओढ़ लिया जाए। उसने ढोल में सिर घुसा तो दिया लेकिन निकालने में फेल। सांप-छछुंदर जैसी स्थिति हो गई। साथियों को परेशानी बताई। वे दशा देख हंसने लगे। ढोल वाला बाबा कहकर चिढ़ाने लगे। कालूराम की तकलीफ या तो राम जाने या खुद कालूराम। ढोल का वजन 10 किलो। धूप से तो बच गया लेकिन मुसीबत सिर पड़ी। आखिर दोस्त उसी हालत में बाइक पर बैठाकर मिस्त्री के पास ले गया। मिस्त्री ने कुशल डॉक्टर की तरह ढोल का ‘ऑपरेशन’ किया और कालूराम के सिर को सकुशल निकाल लिया। 4. चलते-चलते.. चलते-चलते पारस गुर्जर जी को तीन लड़के दिख गए। लड़के बाइक पर थे। बाइक हवा में थी। हेलमेट का अता-पता नहीं था। NSUI के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जोधपुर के रजलानी ग्राम पंचायत के प्रशासक पारस गुर्जर जोधपुर से जयपुर जा रहे थे। तब दूदू के पास यह नजारा दिखा। उन्होंने लड़कों को इशारा करके रुकवाया। बोले- मैं अभी जोधपुर एम्स से सीधे आ रहा हूं। वहां 24 साल के लड़के की एक्सीडेंट में मौत हो गई। तीन दिन से बाप रो रहा है। पत्नी बेसुध है। बच्चे रो रहे हैं। भाई से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर साइन नहीं हो रहे। तुम लोगों को देखकर जी दुखा। हेलमेट पहनकर निकलो प्लीज। अगर बाल खराब होंगे तो मैं नए लगवा दूंगा। घर पर आपका परिवार इंतजार करता है। समझा करो। हेलमेट लगाओ। हालांकि लड़कों को सीख देने के साथ-साथ अपनी सीट बेल्ट का भी ध्यान रखते, तो बेहतर होता। इनपुट सहयोग- धर्मेंद्र सिंह यादव (अलवर)। काका सिंह (श्रीगंगानगर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार को मुलाकात होगी।
दूध के ढोल में 'सिर':राठौड़ साहब ने कुरेदा गहलोतजी का 'जख्म'; मंत्रीजी बोले-लिखो, ‘श्रीराम‘
Leave a comment