वन अधिकार के लिए ढोल-नगाड़ों के साथ रैली निकाली:राजस्थान में कुल दावों का मात्र 43 प्रतिशत को ही अधिकार पत्र,आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी

Actionpunjab
3 Min Read




वन अधिकार कानून के 18 वर्ष पूरे होने के बावजूद इसके पूर्ण क्रियान्वयन में हो रही देरी के खिलाफ आदिवासी समुदाय ने आज उदयपुर में तपन के बीच रैली निकाल कर आक्रोश जताया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए सैकड़ों लोगों ने उदयपुर में रैली निकालकर जनजाति आयुक्त कार्यालय पहुंचे और वहां पर प्रदर्शन कर अपनी बातें रखते हुए कानून को उसकी मूल भावना के अनुरूप लागू करने की मांग की। ‘जंगल जमीन जन आंदोलन’ के बैनर तले आयोजित राज्य स्तरीय आमसभा में उदयपुर, सलूम्बर, पाली, सिरोही और बारा जिलों से आदिवासी महिला-पुरुष शामिल हुए। नगर​ निगम के टाउन हॉल से रैली रवाना हुई जो शहर के अलग अलग मार्गों से होते हुए निकले। उन्होंने जंगल जमीन किसकी है, हमारी है जैसे नारों के साथ जनजाति आयुक्त कार्यालय पहुंचकर आमसभा की। इस दौरान वक्ताओं ने बताया कि राजस्थान में अब तक 1,18,667 दावे पेश हुए, लेकिन केवल 51,775 को ही अधिकार पत्र जारी हुए हैं, जो कुल दावों का मात्र 43.63 प्रतिशत है। सामुदायिक वन अधिकारों की स्थिति भी चिंताजनक बताते हुए पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई। कहा कि राज्य के 10 हजार से अधिक गांवों में जंगल होने के बावजूद केवल 2088 गांवों को ही सामुदायिक अधिकार मिले हैं। इसके अलावा जिन लाभार्थियों को व्यक्तिगत अधिकार पत्र मिले हैं, उनकी जमीन का राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं होने से वे सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। आदिवासी समुदाय ने पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और गीतों के माध्यम से भी चेताया। विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं रखते हुए प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल उठाए। आंदोलन से जुड़े नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो एक महीने बाद बड़ा आंदोलन किया जाएगा। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के आयुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। आयुक्त ने जल्द अभियान चलाकर लंबित दावों के निस्तारण और रिकॉर्ड अपडेट करने का आश्वासन दिया। इस दौरान आन्दोलन के वरिष्ठ पदाधिकारी एडवोकेट रमेश नंदवाना, सिरोही के लखमाराम गरासिया, कोटड़ा के रईसा राम,बारां जिले के शाहबाद के लखन सहरिया, पाली के विरमाराम, संयोजक धरमचंद खैर, सह संयोजक दुर्गा खराड़ी, राजेन्द्र कुमार आदि ने संबोधित किया। ये थी प्रमुख रूप से मांगे

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *