वॉशिंगटन डीसी2 मिनट पहले
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अमेरिका ने वेनेजुएला से 13.5 किलो हाईली एनरिच्ड यूरेनियम हटाया है। यह यूरेनियम कई साल से वहां के एक पुराने रिसर्च रिएक्टर में रखा था। अमेरिका ने शुक्रवार को बताया कि यूरेनियम को कराकास के पास मौजूद साइट से हटाया गया और फिर सुरक्षित तरीके से अमेरिका भेजा गया।
यह ऑपरेशन अमेरिका, वेनेजुएला, ब्रिटेन और IAEA ने मिलकर किया। US डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के मुताबिक यूरेनियम को जमीन और समुद्र के रास्ते अमेरिका पहुंचाया गया। इसे अब साउथ कैरोलाइना के सवाना रिवर परमाणु साइट में प्रोसेस किया जाएगा।
अमेरिकी एजेंसी नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (NNSA) ने कहा कि यह ऑपरेशन दक्षिण अमेरिका और US की सुरक्षा के लिए अहम है। एजेंसी के मुताबिक वेनेजुएला का RV-1 रिसर्च रिएक्टर कई दशक तक न्यूक्लियर रिसर्च के लिए इस्तेमाल होता था। 1991 में रिसर्च बंद होने के बाद भी वहां हाईली एनरिच्ड यूरेनियम रखा रहा।

अमेरिका ने 6 हफ्ते से कम समय में मिशन को अंजाम दिया
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह काम छह हफ्तों से भी कम समय में पूरा हुआ। यूरेनियम को खास कंटेनर में पैक किया गया। इसके बाद करीब 100 मील सड़क के रास्ते बंदरगाह तक ले जाया गया। वहां से ब्रिटेन की न्यूक्लियर ट्रांसपोर्ट सॉल्यूशंस कंपनी के जहाज से अमेरिका भेजा गया।
NNSA के डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. मैट नेपोली भी इस मिशन की निगरानी के लिए वेनेजुएला पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि टीम के अनुभव की वजह से यह ऑपरेशन सफल रहा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी ऑपरेशन की पुष्टि की। एजेंसी ने कहा कि यह जटिल और संवेदनशील ऑपरेशन था।
NNSA के मुताबिक 1996 से अब तक एजेंसी दुनिया के कई देशों से 7,350 किलो से ज्यादा हाईली एनरिच्ड यूरेनियम और प्लूटोनियम हटाने या सुरक्षित करने का काम कर चुकी है।
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन लंबे समय से ईरान के पास मौजूद हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को लेकर दबाव बना रहा है। ईरान के पास ऐसा करीब 408 किलो यूरेनियम बताया जाता है। हालांकि, अमेरिका अब तक उसे हटाने में सफल नहीं हुआ है।

वेनेजुएला में अमेरिका का दखल बढ़ रहा
अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों में भी बदलाव देखने को मिला है। हाल के महीनों में CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ समेत कई अमेरिकी अधिकारी वेनेजुएला पहुंचे। सात साल बाद दोनों देशों के बीच कमर्शियल फ्लाइट भी शुरू हुई है। अमेरिकी दूतावास भी फिर से खोला गया है।
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका अब वहां ऊर्जा और खनन सेक्टर में कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, कुछ लोकतंत्र समर्थक समूह ट्रम्प प्रशासन की इस नीति की आलोचना भी कर रहे हैं।
अमेरिका ने राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार किया था
अमेरिका ने जनवरी 2026 में वेनेजुएला में बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी सेना ने राजधानी कराकस में कार्रवाई करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया। अमेरिका ने उन पर ड्रग तस्करी और आतंक से जुड़े आरोप लगाए। इस ऑपरेशन के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक संकट शुरू हो गया।
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया। अमेरिका ने नई सरकार का समर्थन किया और तेल कारोबार समेत कई आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी। हालांकि रूस, चीन और कई देशों ने अमेरिकी कार्रवाई का विरोध किया।
इसके बाद अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों में बदलाव आया। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क बढ़े और आर्थिक सहयोग शुरू हुआ।
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अमेरिका की स्पेशल फोर्स से जुड़े एक सैनिक मास्टर सार्जेंट गैनन केन वैन डाइक को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने वाले ऑपरेशन पर सट्टा लगाया और इससे करीब 4.09 लाख डॉलर (करीब 4 करोड़ रुपए) कमा लिए। पढ़ें पूरी खबर…
