11 घंटे पहले
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आज (रविवार, 10 मई) मदर्स डे है। स्वामी विवेकानंद से जुड़ा एक ऐसा किस्सा प्रसिद्ध है, जिसमें बताया गया है कि मां को सबसे महान क्यों माना जाता है। एक बार एक व्यक्ति ने स्वामी विवेकानंद से प्रश्न किया- “स्वामी जी, इस संसार में सबसे अधिक महत्व मां को ही क्यों दिया जाता है?”
स्वामी विवेकानंद मुस्कुराए। उन्होंने उस व्यक्ति से कहा, “यदि तुम इस प्रश्न का उत्तर समझना चाहते हो, तो पहले एक काम करो। पांच सेर का एक पत्थर लो, उसे कपड़े में बांधो और अपनी कमर से बांधकर पूरे दिन ऐसे ही रहो। कल सुबह इसी अवस्था में मुझसे मिलना। मैं तुम्हें तुम्हारे प्रश्न का उत्तर समझा दूंगा।”
उस व्यक्ति ने स्वामी जी की बात मान ली। उसने पांच सेर का एक पत्थर लिया और अपनी कमर पर बांध लिया। वह पूरे दिन उस भारी पत्थर को कमर में बांधकर घूमता रहा। कुछ ही घंटों में उसे भारी असहजता, थकान और दर्द महसूस होने लगा। जब उससे ये दर्द सहन नहीं हुआ, तो वह स्वामी जी के पास पहुंचा।
वह बोला, “स्वामी जी, यह तो बहुत कठिन था। मैं एक दिन भी यह बोझ नहीं सह पाया। आपने ऐसा करने को क्यों कहा?”
स्वामी विवेकानंद ने शांत स्वर में उत्तर दिया, “तुम एक पत्थर का भार कुछ घंटे भी सहन नहीं कर पाए, जबकि एक मां अपने बच्चे को नौ महीने अपने गर्भ में रखती है। वह केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक कष्ट भी सहती है। फिर भी वह मुस्कुराती है, घर संभालती है और अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटती।”
यह सुनकर उस व्यक्ति की आंखें भर आईं। उसे समझ आ गया कि मां का त्याग सबसे महान है। इसलिए मां को महान कहा गया है।
किस्से की सीख
- सहनशीलता विकसित करें
मां की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सहनशीलता है। जीवन हमेशा हमारे अनुसार नहीं चलता है। ऐसे में धैर्य रखना और परिस्थितियों को समझकर प्रतिक्रिया देना एक मजबूत व्यक्तित्व की पहचान है। सहनशीलता का गुण मां से सीख सकते हैं।
- निःस्वार्थ सेवा का भाव अपनाएं
मां बिना किसी स्वार्थ के अपने परिवार के लिए जीती है। जीवन में जब हम दूसरों की भलाई के लिए सोचते हैं, काम करते हैं, तो हमारे रिश्ते और सामाजिक जीवन अधिक मजबूत बनते हैं।
- सम्मान देना सीखें
मां के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार में होना चाहिए। यह जरूरी है कि हम अपने आसपास के हर व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं का सम्मान करें, मां के त्याग को समझें और मां को हमेशा खुश रखने की कोशिश करें।
- भावनात्मक नियंत्रण रखें
मां कठिन परिस्थितियों में भी अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखती है। यह गुण हमें सिखाता है कि गुस्से या दुख के दिनों में भी भावनात्मक नियंत्रण बनाए रखना चाहिए, तभी जीवन में सुख-शांति मिलती है।
- जिम्मेदारी को प्राथमिकता दें
मां हमेशा अपनी जिम्मेदारियों को पहले रखती है। हमें भी अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए और काम को टालने की आदत से बचना चाहिए। घर-परिवार हो या समाज हमें हर स्थिति में अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से पूरा करना चाहिए।
- सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं
मां थकान और दर्द के बावजूद मुस्कुराती रहती है। जीवन में सकारात्मक सोच हमें कठिन समय में भी आगे बढ़ने की शक्ति देती है। कितनी भी मुश्किलें आएं, हमें मुस्कान के साथ उनका सामना करना चाहिए।
- रिश्तों को समय दें
सुखी जीवन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है- रिश्तों को समय देना। मां हमें सिखाती है कि प्यार और समय ही किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाते हैं।
