मॉडल से साध्वी बनीं हर्षानंद बोलीं-पढ़ाई से ज्यादा प्रवचन मुश्किल:पहली बार कथा वाचन कर रहीं, इसके लिए किताबें पढ़ रहीं, नोट्स तैयार कर रहीं

Actionpunjab
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सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर और मॉडल से साध्वी बनी ग्लैमरस हर्षा रिछारिया अब पहली बार कथा वाचन कर रही हैं। उज्जैन-मक्सी रोड स्थित लक्ष्मीपुरा में चल रहे सात दिवसीय देवी प्रवचन और अंतरराष्ट्रीय समागम में वह रोज करीब साढ़े तीन घंटे दुर्गा सप्तशती और देवी महिमा का वर्णन कर रही हैं। 18 अप्रैल को दीक्षा लेने के बाद अब साध्वी हर्षानंद गिरी व्यास पीठ पर नजर आ रही हैं। कथा की तैयारी, संस्कृत सीखने की चुनौती, आध्यात्मिक बदलाव और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर उनसे खास बातचीत हुई। पढ़िए हर्षा के साथ भास्कर की पूरी बातचीत- तीन घंटे के प्रवचन के लिए कितनी तैयारी करनी पड़ती है? जवाब- स्कूल-कॉलेज में भी कभी इतनी पढ़ाई नहीं की, जितनी अब करनी पड़ रही है। कथा शुरू होने से पहले लगातार दस दिन तक दिन-रात अध्ययन किया। कई बार पढ़ते-पढ़ते सुबह के चार बज जाते थे। दुर्गा सप्तशती, शक्ति विशेषांक और देवी भागवत सार जैसी किताबें पढ़ीं और नोट्स बनाए। कथा में किसी प्रसंग को लेकर सवाल रह जाता था तो गुरुजी और संतों से उसका जवाब पूछती थी। तैयारी में पूरी तरह डूब गई थी। पहली बार प्रवचन देने में सबसे बड़ी दिक्कत क्या आ रही है? जवाब- मेरी पढ़ाई हिंदी और अंग्रेजी माध्यम से हुई है। संस्कृत कभी विषय नहीं रहा, इसलिए धार्मिक ग्रंथों के श्लोक समझने में दिक्कत आती है। मैं नहीं चाहती कि भक्तों तक कोई गलत जानकारी पहुंचे, इसलिए फिलहाल संस्कृत के श्लोकों का अर्थ बताने से बचती हूं। संस्कृत को ठीक से सीखने और समझाने में करीब एक साल लगेगा। हालांकि मेरा मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में संस्कृत अनिवार्य होनी चाहिए। एंकरिंग से कथा मंच तक का बदलाव कैसा लग रहा है? जवाब- पहले मंच पर पढ़े-लिखे और तकनीकी लोग सामने होते थे, लेकिन अब भक्त बैठे होते हैं जो भावनाओं से जुड़ते हैं। यहां दिल से जुड़ाव महसूस होता है। मैं जो महसूस करती हूं, वही भक्त भी महसूस करते हैं। यह अनुभव अलग तरह का आध्यात्मिक आनंद देता है, जिसे केवल महसूस किया जा सकता है। कथा में आपकी टीम कैसे काम कर रही है? जवाब- 18 अप्रैल को दीक्षा हुई और इतनी जल्दी कथा का अवसर मिल गया। शुरुआत में थोड़ा असहज थी, लेकिन गुरुजी ने भजन मंडली और संतों के सहयोग से आगे बढ़ने को कहा।
भजन मंडली अनुभवी है और पूरा आयोजन परिवार जैसा लग रहा है। यहां सेवा में लगे स्वयंसेवक, आयोजन समिति और श्रद्धालु सभी मेरी टीम का हिस्सा हैं। भक्तों को कथा में क्या विशेष बता रही हैं? जवाब- मैं दुर्गा सप्तशती, शक्ति विशेषांक और देवी भागवत सार के माध्यम से मां भगवती की शक्ति का वर्णन कर रही हूं। पहले से ही देवी उपासना और पाठ से जुड़ी रही हूं।
कई बार कठिन परिस्थितियों में ऐसा महसूस हुआ कि मां भगवती ने ही रक्षा की। उन्हीं अनुभूतियों और भावनाओं को भक्तों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हूं। भगवती की कथा करने का विचार कैसे आया? जवाब- मैंने कभी नहीं सोचा था कि कथा करूंगी। पिछले एक साल में कई संतों और सिद्ध लोगों ने देवी कथा करने की बात कही। गुरुजी ने भी कहा कि जब ईश्वर किसी से कुछ कराना चाहता है तो संकेत देता है। तब समझ आया कि जीवन में जो बदलाव हो रहे थे, वे किसी उद्देश्य से थे। अब जीवनभर देवी महिमा का प्रचार करती रहूंगी। कथा करने की जरूरत क्यों महसूस हुई? जवाब- देवी कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का माध्यम भी है। जब व्यास पीठ से देवी शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का वर्णन होता है, वही असली महिला सशक्तिकरण है। समाज में फैल रही गलत प्रवृत्तियों और भटकाव के खिलाफ जागरूकता जरूरी है। ये है महायज्ञ और कथा स्थल का माहौल उज्जैन-मक्सी रोड पर गांव लक्ष्मीपुरा के आगे 108 कुंडीय सहस्त्र चंडीय अतिरुद्र महायज्ञ चल रहा है। रोड किनारे स्वागत द्वार, झूले और बांस का विशाल पंडाल बना है, जहां आहुतियां दी जा रही हैं। कथा मंच के पास निजी अस्पताल रहे भवन में करीब 150 संत ठहरे हैं। कथा के बाद साध्वी हर्षानंद गिरी संतों के बीच आसंदी पर बैठीं। मीडिया प्रभारी रजत निगम ने बताया, 12 सदस्यीय टीम कथा के शॉट्स एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल कर रही है। संयोजक राजपालसिंह सिसौदिया के अनुसार रोज 3000 लोगों की प्रसादी बन रही है और 1000 से ज्यादा वालेंटियर व्यवस्था संभाल रहे हैं। ये खबर भी पढ़ें… हर्षानंद का संतों को चैलेंज- फॉरेन फंडिंग साबित करें उज्जैन में संन्यास विवाद के बीच स्वामी हर्षानंद गिरि (पूर्व में हर्षा रिछारिया) ने नया वीडियो जारी कर संतों के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने फॉरेन फंडिंग के आरोपों को खारिज किया। कहा कि एक भी आरोप सही साबित हुआ तो वह अपनी पूरी संपत्ति अर्पित कर देंगी। पढ़ें पूरी खबर…

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