16 संस्कार घर-घर पहुंचाने का संकल्प:विश्वगुरु भारत बनाने पर जोर,सनातन धर्म रक्षा महासंघ के वक्ता ने बोले– 151 परिवारों में कराए गए संस्कार

Actionpunjab
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अयोध्या के गुप्तार घाट स्थित गुप्त हरि मंदिर में सनातन धर्म रक्षा महासंघ के तत्वावधान में संगोष्ठी एवं बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन आचार्य धर्मदास ने किया, जबकि अध्यक्षता भार्गव मुनीश महाराज ने की। बैठक में सनातन संस्कृति के संरक्षण, 16 संस्कारों के प्रचार-प्रसार और भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प पर जोर दिया गया। हर घर तक पहुंचे सनातन परंपरा के संस्कार महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता भार्गव मुनीश महाराज ने कहा कि संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चक्रेश नारायण का उद्देश्य सनातन परंपरा के 16 संस्कारों को घर-घर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता और संस्कारों का पुनर्जागरण ही भारत को फिर से विश्वगुरु बना सकता है। उन्होंने बताया कि देवीपाटन मंडल में इस अभियान पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। मंडल प्रभारी घनश्याम पांडेय के नेतृत्व में गोंडा नगर अध्यक्ष रंजीत पांडे और उनकी टीम ने एक माह में 151 परिवारों में विभिन्न संस्कार संपन्न कराए। इनमें जातकर्म, अन्नप्राशन, चूड़ाकरण और नामकरण संस्कार प्रमुख रहे। ‘16 संस्कार मानव जीवन का आधार’ भार्गव मुनीश महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म में 16 संस्कारों को मानव जीवन का आधार माना गया है। गर्भाधान से लेकर अंत्येष्टि तक होने वाले ये संस्कार व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से परिपक्व बनाते हैं। उन्होंने कहा कि नामकरण, अन्नप्राशन, उपनयन और विवाह जैसे संस्कार व्यक्ति में कर्तव्यबोध, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास करते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार संस्कार केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को मर्यादा और सद्गुणों से जोड़ने की प्रक्रिया हैं। अधिक मास और रुद्राभिषेक पर भी हुई चर्चा बैठक में अधिक मास के महत्व पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि इस अवधि में भगवान शिव की आराधना, जप, तप और दान का विशेष महत्व होता है। इसी क्रम में नागेश्वरनाथ मंदिर के पास राम की पैड़ी पर पूरे महीने रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन आचार्य मोहन पांडे के नेतृत्व में संपन्न होगा। बड़ी संख्या में मौजूद रहे कार्यकर्ता कार्यक्रम में आचार्य शिवशंकर, रोहित सिंह, उदय बाबा, जगन्नाथ पांडे, आचार्य सतीश, संदीप सिंह, मनोज गुप्ता, आचार्य हरिओम, शिवनंदन, आचार्य ओंकार और महंत घनश्याम दास समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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