प्रेमानंदजी की तबीयत बिगड़ी, पदयात्रा बंद की:अनिश्चितकाल तक एकांतिक दर्शन भी नहीं होंगे; शिष्यों ने भक्तों से कहा- कृपया वापस जाइए

Actionpunjab
5 Min Read




संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत बिगड़ गई है। इसके चलते उन्होंने रात्रि पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी है। इसके अलावा, महाराजजी के एकांतिक दर्शन भी नहीं होंगे। रविवार रात हजारों की संख्या में भक्त उनके दर्शन के लिए पहुंचे, लेकिन प्रेमानंदजी हर दिन की तरह तड़के 3 बजे पदयात्रा पर नहीं निकले। उनकी जगह उनके शिष्य पहुंचे। शिष्यों ने लाउडस्पीकर से अनाउंस कर बताया- आप सभी से निवेदन है कि महाराजजी का स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण आज से पदयात्रा रद्द की जा रही है। कृपया रोड किनारे खड़े होकर भीड़ न लगाएं। इसके बाद भक्तों को महाराजजी के दर्शन किए बिना मायूस लौटना पड़ा। केली कुंज आश्रम के मुताबिक, महाराजजी को 21 साल से किडनी की समस्या है। 2 तस्वीरें देखिए- भक्त बोले- राधा से प्रार्थना करते हैं कि महाराजजी जल्द ठीक हों डेढ़ किमी पैदल चलकर जाते हैं महाराज संत प्रेमानंद महाराज इन दिनों तड़के 3 बजे केली कुंज आश्रम से सौभरी वन के लिए निकलते हैं। डेढ़ किमी पैदल चलकर जाते हैं। प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं। आम दिनों में यह संख्या करीब 20 हजार के करीब होती है। वीकेंड और बड़े पर्वों पर दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या कई गुना बढ़कर लाखों में पहुंच जाती है। अब संत प्रेमानंद महाराज की कहानी 13 साल की उम्र में घर छोड़ा
प्रेमानंद महाराज का जन्म यूपी में कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। 3 भाई हैं, प्रेमानंद मंझले हैं। बचपन में प्रेमानंद जी का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। वह बचपन से ही आध्यात्मिक रहे। कक्षा 8 तक पढ़ाई की है। बचपन में अनिरुद्ध ने अपनी सखा टोली के साथ शिव मंदिर के लिए एक चबूतरा बनाना चाहा। इसका निर्माण भी शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों ने रोक दिया। इससे वह मायूस हो गए। उनका मन इस कदर टूटा कि घर छोड़ने का फैसला कर लिया। वह कानपुर होते हुए काशी पहुंचे। जब 13 साल के हुए तो उन्होंने ब्रह्मचारी बनने का फैसला किया। शुरुआत में प्रेमानंद महाराज का नाम ‘आरयन ब्रह्मचारी’ रखा गया। काशी में उन्होंने करीब 15 महीने बिताए। उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। फिर वह मथुरा आ गए। संन्यासी से राधावल्लभी संत बन गए प्रेमानंद महाराज प्रेमानंद महाराज वृंदावन पहुंचकर हर रोज बांके बिहारी जी के दर्शन करते। फिर रासलीला रास आई और राधावल्लभ के कार्यक्रमों में जाने लगे। वहां घंटों खड़े रहते। एक दिन एक संत ने श्री राधारससुधानिधि से एक श्लोक पढ़ा, लेकिन महाराज उसे समझ नहीं पाए। फिर एक दिन वृंदावन की परिक्रमा करते समय एक सखी को एक श्लोक गाते हुए सुना। उसे सुनकर महाराज ठिठक गए। श्लोक ऐसा रास आया कि अपना संन्यास धर्म तोड़कर वो उस सखी के पास गए। उससे श्लोक का मतलब पूछा। सखी ने कहा- इसका मतलब समझने के लिए राधावल्लभी होना जरूरी है। इस तरह महाराज राधावल्लभी हो गए। ———————————— यह खबर भी पढ़िए:- 20 हजार शिक्षक-अनुदेशकों की भर्ती होगी- योगी का ऐलान:लखनऊ में CM ने 24 हजार अनुदेशकों को बढ़ी सैलरी का चेक दिया सीएम योगी ने रविवार को लोकभवन में 24 हजार 717 अनुदेशकों को बढ़े हुए मानदेय का चेक दिया। सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से उनका मानदेय 9 हजार रुपए से बढ़ाकर 17 हजार किया है। कार्यक्रम में सीएम योगी ने शहरी स्कूलों में 20 हजार नए शिक्षक और अनुदेशकों की भर्ती का ऐलान किया। कहा, 10 हजार नए शिक्षकों की भर्ती के लिए डिमांड की जा चुकी है। जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नए अनुदेशकों की नियुक्ति भी की जाएगी। पढ़ें पूरी खबर…

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *