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उदयपुर शहर के समीप लकड़वास गांव में बुधवार को एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। मां के प्रति प्रेम, सम्मान और संस्कारों की अनूठी मिसाल पेश करते हुए चार बेटियों ने अपनी दिवंगत मां जुली जोशी की अंतिम यात्रा को कंधा दिया और कांपते हाथों व भारी मन से स्वयं मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार सम्पन्न किया। 55 वर्षीय जुली जोशी बीमार चल रही थीं। 19 मई 2026 को एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। भावुक संयोग यह रहा कि जिस दिन उनका जन्मदिन था, उसी दिन उनके गांव लकड़वास में उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। पूरे गांव में शोक और संवेदनाओं का माहौल पसरा रहा। जुली जोशी ने जीवनकाल में अपनी बेटियों मीनाक्षी, कोमल, चेतना और रवीना से इच्छा जताई थी कि उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार की सभी जिम्मेदारियां वही निभाएं। मां की इस आखिरी इच्छा को बेटियों ने अपना सबसे बड़ा धर्म मानते हुए पूरे साहस, श्रद्धा और भावनात्मक समर्पण के साथ निभाया। चारों बहनों के भाई नहीं है। जब बेटियां अपनी मां की अर्थी को कंधा देकर चल रही थीं, तब वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। अंतिम विदाई के उन मार्मिक पलों में हर कोई भावुक हो उठा। बेटियों ने समाज की पुरानी सोच को पीछे छोड़ते हुए यह संदेश दिया कि बेटियां केवल परिवार की जिम्मेदारी ही नहीं निभातीं, बल्कि माता-पिता के हर सुख-दुख में सबसे बड़ा सहारा भी बनती हैं। ग्रामीणों और उपस्थित लोगों ने बेटियों के इस साहसिक और संवेदनशील कदम की सराहना करते हुए इसे समाज में समानता, संस्कार और माता-पिता के प्रति सच्चे सम्मान की प्रेरणादायक मिसाल बताया।
नम आंखों से चार बेटियों ने निभाया मां का वादा:बथर्ड के दिन निकली मां की अंतिम यात्रा, बेटियों ने दिया कंधा और मुखाग्नि
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