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- Avdheshanand Giri Maharaj Life Lesson. Knowledge Reveals The Truth; When Our Mind Repeatedly Thinks About Loss, Failure, We Become Sad And Distressed.
हरिद्वार7 मिनट पहले
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हमारे मन में सुख-दुख, मान-अपमान, हानि-लाभ और जय-पराजय जैसे भाव उत्पन्न होते हैं। जब मन बार-बार हानि, पराजय, दुखद घटनाओं या प्रतिकूल परिस्थितियों के बारे में सोचता है, तब वह दुखी हो जाता है। मन स्वभाव से अनुकूल परिस्थितियों की इच्छा करता है और प्रतिकूलताओं को स्वीकार नहीं कर पाता। इसी कारण छोटी-छोटी कठिनाइयां भी उसे भीतर से कमजोर कर देती हैं। हमारे विचार सकारात्मक हैं, तो हमारा मन विपरीत परिस्थितियों में भी स्थिर रह सकता है।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए हम कब चिंतित होते हैं?
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