15 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

अभी ज्येष्ठ अधिक मास चल रहा है और इस महीने में पड़ने वाली कमला एकादशी का महत्व काफी अधिक है। यह एकादशी 26 और 27 मई को दो दिन पड़ रही है। मान्यताओं है कि अधिक मास में आने वाली यह एकादशी करीब तीन साल में एक बार आती है, इसलिए इसका महत्व सामान्य एकादशी से कई गुना अधिक माना गया है। इसे पुरुषोत्तमी एकादशी भी कहते हैं।
हिन्दी पंचांग में कमला एकादशी तिथि 26 मई की सुबह शुरू होकर 27 मई की सुबह तक रहेगी। उदयातिथि की एकादशी 27 मई को है, इसलिए अधिकतर लोग इसी दिन व्रत रखेंगे। व्रत का पारण 28 मई की सुबह किया जाएगा। उदयातिथि यानी 27 तारीख को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि रहेगी।
यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और उपवास करने से भक्त के जाने-अनजाने में हुए पाप कर्मों का फल खत्म हो जाता है। इस व्रत से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कमला एकादशी व्रत करने से सालभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य मिलता है। इस दिन व्रत-पूजा के साथ मंत्र जप और दान भी करना चाहिए।
ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
इस दिन सुबह स्नान करके घर के मंदिर में व्रत और पूजा करने का संकल्प लेना चाहिए। मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर पूजा करनी चाहिए। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है। विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप भी करना चाहिए।
कमला एकादशी पर पूजा के साथ ही आचरण की शुद्धता पर भी ध्यान देना चाहिए। व्रत करने वाले भक्त को दिनभर संयमित रहना चाहिए और गुस्सा, झूठ, चुगली और दूसरों के लिए अपमानजनक बातें करने से बचना चाहिए। इस दिन मांस, शराब, लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। कई लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु एक समय फलाहार करते हुए यह व्रत करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति देने वाला माना गया है। इस व्रत से नकारात्मक विचार दूर होते हैं। शाम को तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाकर 11 परिक्रमा करने की भी परंपरा बताई गई है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि कमला एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को तीर्थ स्नान के समान पुण्य और यज्ञों से मिलने वाले पुण्य के समान फल मिलता है।
