आजीविका मिशन के कर्मचारी झेल रहे आर्थिक संकट:7 महीनों से नहीं मिली सैलरी; 'लखपति दीदी' बनाने का जिम्मा, खुद की जेब खाली

Actionpunjab
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हरियाणा में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली योजनाओं को जमीन पर लागू करने वाले हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन (एचआरएलएम) के कर्मचारियों की खुद की आजीविका संकट में आ गई है। मिशन में कार्यरत कर्मचारियों को पिछले करीब सात महीने से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों के मुताबिक, उन्हें आखिरी बार दिसंबर 2025 का वेतन मिला था। इसके बाद से वे लगातार वेतन जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारी किराया, बच्चों की फीस, बैंक की किस्तें और दैनिक जरूरतों का खर्च उठाने में परेशानी झेल रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों के समक्ष वेतन जारी करने की मांग रखी, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। ब्लॉक से लेकर जिला स्तर पर कार्यरत हैं कर्मचारी प्रदेशभर में मिशन के तहत डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट मैनेजर (डीपीएम), ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर (बीपीएम) और ब्लॉक क्लस्टर कोऑर्डिनेटर (बीसीसी) समेत विभिन्न पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें डीपीएम को करीब 70 से 80 हजार रुपए, बीपीएम को 40 से 45 हजार रुपए तथा बीसीसी को 20 से 25 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है। नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया कि, अब वेतन नहीं मिलने से गुजारा करना मुश्किल हो गया है। जानिए, क्या काम करते हैं मिशन के कर्मचारी हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (सेल्फ हेल्प ग्रुप) से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। मिशन के माध्यम से महिलाओं को पशुपालन, बुटीक, स्वरोजगार और अन्य आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाता है ताकि वे अपना जीवन यापन बेहतर तरीके से कर सकें। इसके अतिरिक्त केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी’ योजना को सफल बनाने के साथ-साथ ‘ड्रोन दीदी’ जैसी परियोजनाओं का संचालन भी यही कर्मचारी कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि एक ओर उनसे सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरी क्षमता से लागू करने की अपेक्षा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उनका मनोबल लगातार गिर रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द लंबित वेतन जारी करने की मांग की है, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें और योजनाओं के प्रभावी संचालन में पूरी क्षमता से योगदान दे सकें।

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