JLN अस्पताल के नर्सिंग कर्मियों ने दीया अल्टीमेटम:1 जून से कार्य बहिष्कार की चेतावनी, मार्च से लंबित सैलरी और सुरक्षा राशि वापसी की मांग

Actionpunjab
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अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल में पन्नाधाय प्लेसमेंट एजेंसी के तहत कार्यरत नर्सिंग कर्मियों ने लंबित वेतन और अन्य मांगों को लेकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। नर्सिंग कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो 1 जून से अस्पताल की कार्य व्यवस्था प्रभावित होगी और कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे। नर्सिंग एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विशाल पाराशर ने शनिवार को बताया कि पन्नाधाय प्लेसमेंट एजेंसी के अंतर्गत 227 कर्मचारियों की वित्तीय स्वीकृति है, जबकि वर्तमान में 238 कर्मचारी कार्यरत हैं। अतिरिक्त 11 कर्मचारियों के जॉइनिंग लेटर, अनुभव प्रमाण पत्र और वेतन भुगतान को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों का वेतन कई महीनों से लंबित है। हाल ही में अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे से वार्ता के बाद केवल फरवरी माह का वेतन जारी किया गया, जबकि मार्च से अब तक का भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा नियुक्ति के समय सुरक्षा राशि के रूप में जमा करवाई गई 15 हजार रुपए की डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) भी कर्मचारियों को वापस नहीं लौटाई गई है। नई एजेंसी की तैयारी, पुरानी जिम्मेदारी से पीछे नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि अस्पताल में नई कंपनी को कार्य सौंपने की तैयारी चल रही है, लेकिन पुरानी एजेंसी और प्रशासन दोनों ही कर्मचारियों की समस्याओं की जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार जब उन्होंने नर्सिंग अधीक्षक से इस संबंध में चर्चा की तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला और कहा गया कि दोनों एजेंसियां जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं। दो साल से कम वेतन में कर रहे काम विशाल पाराशर ने कहा कि नर्सिंग कर्मी पिछले दो वर्षों से 7 से 8 हजार रुपए मासिक वेतन पर पूरी निष्ठा से सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद समय पर वेतन नहीं मिलना और सुरक्षा राशि वापस नहीं होना कर्मचारियों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए। नर्सिंग एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो मामला चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के समक्ष उठाया जाएगा। साथ ही 1 जून से जेएलएन अस्पताल में कार्य बहिष्कार कर आंदोलन तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और संबंधित एजेंसी की होगी।

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