कैबिनेट मंत्री पटेल बोल-तीन साल में प्रदूषण मुक्त होगी जोजरी:गंदे पानी और सीवरेज को पूरी तरह ट्रीट करके किया जाएग स्थायी समाधान

Actionpunjab
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जोधपुर की जोजरी नदी पर कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा- प्रशासन को इस पाइपलाइन के बारे में जानकारी नहीं थी। सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर है और इसका स्थाई समाधान किया जाएगा। मंत्री जोगाराम पटेल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा- जोजरी नदी का विषय सबसे महत्वपूर्ण है। न्यायालय द्वारा सख्त रुख अपनाते हुए सभी अवैध फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश दिया गया है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि लगातार निरीक्षणों के बावजूद जो गुप्त पाइपलाइन मिली, वह पहले प्रशासन की जानकारी में भी नहीं थी। पटेल ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार और सर्वोच्च न्यायालय दोनों इस विषय पर बेहद गंभीर हैं, जिससे अब इस पुरानी समस्या का हमेशा के लिए निदान हो जाएगा। दोनों नदियों को दो तीन साल में प्रदूषण मुक्त करने की योजना
पटेल ने प्रदूषण के स्थायी समाधान के बारे में बताते हुए कहा कि बजट में पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने और प्रदूषित जल को जोजरी व लूणी नदी में जाने से रोकने की योजना बनाई गई है। गंदे पानी और सीवरेज को पूरी तरह ट्रीट किया जाएगा। आने वाले दो-तीन वर्षों में दोनों नदियों को प्रदूषण मुक्त करने का सरकार का पक्का संकल्प है। साथ ही जोधपुर आईआईटी (IIT) के साथ भी एक प्रोजेक्ट प्लानिंग स्टेज में है। यह था मामला जोजरी को दूषित होने से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाईपावर कमेटी ने बुधवार रात औचक निरीक्षण कर अवैध पाइपलाइन को पकड़ा था। सांगरिया स्थित सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) में ही एक अवैध पाइपलाइन के जरिए टेक्सटाइल फैक्ट्रियों के पानी को साफ किए बिना ही सीधे जोजरी नदी में छोड़ा जा रहा था। यह लाइन सीधी जोजरी नदी में जा रही थी। गुरुवार को इस पाइपलाइन को जेसीबी की सहायता से उखाड़ दिया गया था। दरअसल, हाईपावर कमेटी को गोपनीय सूचना से इस पाइपलाइन की जानकारी मिली। कमेटी ने तुरंत ही सीईटीपी पर छापा मार दिया। कमेटी ने आसपास जांच की तो एक किमी लंबी यह लाइन पकड़ में आ गई। इतनी बड़ी गड़बड़ी मिलने से हड़कंप मच गया। जिला कलेक्टर सहित तमाम आला अधिकारी भी आधी रात ही प्लांट पर पहुंच गए थे। सूचना पर प्रदूषण विभाग के अधिकारी भी पहुंचे। अब मामले की जांच करवाकर दोषियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। जोजरी संरक्षण के लिए पिछले साल बनी थी कमेटी जोजरी नदी में लगातार बह रहे फैक्ट्रियों के केमिकल और रीको क्षेत्र के गंदे पानी के कारण उसका अस्तित्व खतरे में आ गया है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 21 नवंबर को हाईपावर कमेटी का गठन किया था। कोर्ट ने इस कमेटी को सीधे तौर पर जोजरी नदी की मॉनिटरिंग करने, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने के असीमित अधिकार दिए थे। हर महीने टीम करती है दौरा इस पूरे मामले में जोधपुर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका और कार्यशैली पर सबसे बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए थे। मामला विभागीय अधिकारियों की उद्योगपतियों के साथ गहरी मिलीभगत की ओर भी इशारा करता है, क्योंकि विभाग की आंखों के सामने इतनी बड़ी पाइपलाइन डाल दी गई और किसी को पता तक नहीं चला, जबकि विभागीय टीम हर महीने बाकायदा इस सीईटीपी प्लांट का दौरा करती है, औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पानी के सैंपल लेती हैं और कागजी रिपोर्ट तैयार करती हैं। इसके अलावा जेपीसीआरएफ की भूमिका भी संदिग्ध है। मामला सामने आने के बाद राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने रीजनल ऑफिसर कामिनी सोनगरा को एपीओ कर दिया था। वहीं, लैब इंचार्ज देवेंद्र सिंह और रीजनल ऑफिस में एईई कुणाल खत्री को सस्पेंड किया गया। लापरवाही पर सीईटीपी ट्रस्टियों के खिलाफ केस दर्ज कर दो औद्योगिक इकाइयों को सील भी किया गया है। जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने आगामी आदेश तक सीईटीपी-टेक्सटाइल और इसकी सदस्य इकाइयों को बंद रखने तथा 24 घंटे सख्त निगरानी के निर्देश जारी किए हैं।

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