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सिरसा जिले के डबवाली के उपमंडल नागरिक अस्पताल में एक महिला को आंखों की दवा देने में कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल की डिस्पेंसरी से मिली दवा आंखों में डालते ही महिला की पलकें चिपक गईं। करीब 2 घंटे तक महिला की आंखें नहीं खुल पाईं। यह घटना नरसिंह कॉलोनी, डबवाली निवासी बलजिंद्र कौर पत्नी हरपाल सिंह के साथ हुई। बलजिंद्र कौर बुधवार को डबवाली के सरकारी अस्पताल में अपनी आंखों की जांच करवाने आई थीं। डॉक्टर ने उन्हें 3 अलग-अलग आई ड्रॉप्स लिखे, जो उन्होंने अस्पताल परिसर की सरकारी डिस्पेंसरी से प्राप्त किए। बलजिंद्र कौर ने बताया कि गुरुवार को उन्होंने पहले 2 आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल किया, जिससे कोई समस्या नहीं हुई। लेकिन जैसे ही उन्होंने तीसरी शीशी से बूंदें आंखों में डालीं, उनकी पलकें तुरंत चिपक गईं। काफी प्रयास के बाद भी उनकी आंखें नहीं खुल पाईं। परिजनों की मदद से काफी मशक्कत के बाद महिला की आंखें खुलवाई जा सकीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक सामाजिक संस्था ने अस्पताल के एसएमओ को लिखित शिकायत सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दो घंटे तक अंधी रही महिला इस खौफनाक मंजर को देखकर महिला के परिवार में हडक़ंप मच गया। पीड़ित बलजिंद्र कौर ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, दवा डालते ही मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी आंख में फैविक्विक डाल दी हो। मैं दो घंटे तक पूरी तरह अंधी हो गई और असहनीय दर्द व मानसिक परेशानी से तड़पती रही। परिजनों ने जब उस शीशी की सत्यता जांचने के लिए उसकी एक बूंद को अपनी दो उंगलियों पर डालकर देखा, तो हैरान रह गए, दोनों उंगलियां भी तुरंत आपस में चिपक गईं। प्रार्थी के अनुसार, यह संदिग्ध शीशी डिस्पेंसरी के कर्मचारी ने उसे अंदर रखे फ्रीज (रेफ्रिजरेटर) से निकालकर दी थी। कड़ी मशक्कत के बाद खुली आंख परिस्थिति बिगड़ती देख पीड़ित महिला के परिजन तुरंत उसे डबवाली में ही एक जानकार शख्स के पास लेकर गए। वहां करीब 2 घंटे की कड़ी मशक्कत और प्राथमिक उपचार के बाद महिला की आंखों को बमुश्किल खुलवाया जा सका, तब जाकर परिवार ने राहत की सांस ली। यह दवा आंखों को आराम देने की जगह मरीज के लिए जी का जंजाल बन गई थी। इसके बाद महिला के भतीजे वजीर सिंह ने इस पूरी घटना की जानकारी श्री अमरनाथ युवा सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश जोशी को दी। मामले को बेहद गंभीर मानते हुए मुकेश जोशी तुरंत पीड़ित परिवार के साथ उपमंडल नागरिक अस्पताल के एसएमओ डॉ. सुदीप गोयल से मिले। उन्होंने एसएमओ को वह विवादित दवा की शीशी सौंपते हुए इस पूरे मामले की गहनता से जांच करने के लिए एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा। डिस्पेंसरी में कैसे आई फैविक्विक, उठ रहे हैं बड़े सवाल जानकार सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दवा की उस आधिकारिक शीशी के अंदर दवा नहीं, बल्कि हूबहू फैविक्विक जैसी कोई बेहद ज्वलनशील और चिपचिपी सिंथेटिक वस्तु भरी हुई थी। अब जनता के बीच यह सबसे बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर सरकारी अस्पताल की अति-संवेदनशील डिस्पेंसरी के भीतर, वो भी फ्रिज के अंदर, दवा की शीशी में यह खतरनाक केमिकल कैसे और कहां से आया? क्या यह किसी कर्मचारी की आपराधिक लापरवाही है या फिर सप्लाई चेन में ही कोई बड़ा घालमेल है? सामाजिक संस्था ने मांग की है कि इस बैच की अन्य सभी दवाइयों की शीशियों की भी तुरंत लैब जांच करवाई जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य आंखों के रोगी की रोशनी जाने से बचाई जा सके। एसडीसीएच एसएमओ सुदीप गोयल ने महिला के परिजनों द्वारा दी गई शिकायत को सिविल सर्जन के पास भेज दिया गया है। मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में दे दिया गया है। मामला उनके संज्ञान में है।
डबवाली में अस्पताल की दवा से महिला की पलकें चिपकी:दो घंटे तक नहीं खुलीं आंखें, चेकअप के बाद ली थी 3 आई ड्रॉप्स
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