टोंक के 34,748 किसानों को अब दिन में मिलेगी बिजली:रात में सिंचाई से मिलेगा छुटकारा, जहरीले जीवों का खतरा भी होगा कम

Actionpunjab
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टोंक के 34,748 कृषि उपभोक्ताओं को अब कृषि कनेक्शनों पर रात के बजाय दिन में बिजली मिलेगी। इससे किसानों को रात में खेतों पर जाकर सिंचाई करने से राहत मिलेगी। साथ ही सर्दी और बारिश के मौसम में रात के समय खेतों में काम करने की मजबूरी खत्म होगी तथा जहरीले जीव-जंतुओं के डंसने का खतरा भी काफी कम हो जाएगा। किसानों को अब दिन में दो ब्लॉकों में बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी। टोंक में 34,748 और चित्तौड़गढ़ में 1.01 लाख कृषि उपभोक्ता चित्तौड़गढ़ प्रदेश में कृषि उपभोक्ताओं की सर्वाधिक संख्या वाला जिला है। अजमेर विद्युत वितरण निगम के इस सर्किल में 1.01 लाख कृषि उपभोक्ता हैं। वहीं जयपुर डिस्कॉम के टोंक सर्किल में 34,748 कृषि उपभोक्ता हैं। इससे पहले अप्रैल माह में जयपुर विद्युत वितरण निगम के दौसा और करौली जिलों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा गया था। अब प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को कृषि कार्य के लिए दिन के दो ब्लॉक में बिजली उपलब्ध हो रही है। किसानों को परिवार के साथ समय बिताने का अवसर ऊर्जा सचिव एवं डिस्कॉम्स चेयरमैन आरती डोगरा ने बताया – जयपुर, जोधपुर और अजमेर विद्युत वितरण निगम तथा प्रसारण निगम द्वारा दो ब्लॉक सप्लाई की बाधाओं को दूर करने को प्राथमिकता दी जा रही है। ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाने, लाइनों के विस्तार और नए सब स्टेशन स्थापित करने के कार्य किए जा रहे हैं। इन 26 जिलों में मिल रही है दिन में दो ब्लॉक बिजली आरती डोगरा के अनुसार, अजमेर डिस्कॉम के 14 में से 13, जयपुर डिस्कॉम के 15 में से 10 तथा जोधपुर डिस्कॉम के 12 में से 3 जिलों में कृषि क्षेत्र को दिन में दो ब्लॉक में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। अजमेर डिस्कॉम के अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, उदयपुर, सलूम्बर, प्रतापगढ़, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, झुंझुनूं, सीकर और चित्तौड़गढ़, जयपुर डिस्कॉम के धौलपुर, बूंदी, कोटा, झालावाड़, जयपुर, डीग, भरतपुर, दौसा, करौली और टोंक तथा जोधपुर डिस्कॉम के जालौर, सिरोही और पाली जिलों में यह सुविधा उपलब्ध है। पीएम कुसुम योजना निभा रही अहम भूमिका दो ब्लॉक सप्लाई व्यवस्था को सफल बनाने में पीएम कुसुम योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राज्य सरकार इस योजना को तेजी से बढ़ावा दे रही है। इसके तहत प्रदेश के गांवों और ढाणियों में 4,338 मेगावाट क्षमता की 1,967 लघु सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। योजना के अंतर्गत टोंक जिले में अब तक 34 मेगावाट तथा चित्तौड़गढ़ जिले में 46 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा प्लांट लगाए जा चुके हैं।

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