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जौनपुर में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स (बीपीईएस) और बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रमों की शुरुआत हो गई है। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में वर्षों से अनुपयोगी पड़ी भूमि और अन्य संसाधनों का उपयोग अब शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों के लिए किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, नए पाठ्यक्रमों से परिसर में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। इसके तहत करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित तालाब का उपयोग मत्स्य पालन तथा कृषि संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। वहीं खाली पड़ी भूमि पर कृषि फसलों का उत्पादन, अनुसंधान और विभिन्न प्रयोगात्मक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। बागवानी और कृषि आधारित गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा परिसर में विकसित हरित क्षेत्र और विभिन्न प्रजातियों के पौधों का उपयोग बागवानी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। विश्वविद्यालय की योजना भविष्य में इन पाठ्यक्रमों के साथ मधुमक्खी पालन, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को भी जोड़ने की है, ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और कौशल आधारित प्रशिक्षण मिल सके। खेल सुविधाओं का होगा बेहतर उपयोग बीपीईएस पाठ्यक्रम शुरू होने से विश्वविद्यालय की खेल सुविधाओं का भी व्यापक उपयोग संभव होगा। विश्वविद्यालय पहले से ही खेल गतिविधियों के लिए पहचान रखता है और यहां के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि बीपीईएस के बाद मास्टर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स (एमपीईएस) पाठ्यक्रम की मान्यता के लिए भी आवेदन किया गया है। मंजूरी मिलने पर खेल शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों के लिए उच्च अध्ययन के नए अवसर उपलब्ध होंगे। संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर विश्वविद्यालय की योजना उपलब्ध प्रत्येक संसाधन को शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास से जोड़ने की है। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल परिसर की अनुपयोगी भूमि का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगारपरक शिक्षा के अधिक अवसर भी मिलेंगे।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय में बीपीईएस, बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम शुरू:शिक्षा और शोध में होगा खाली भूमि का उपयोग, तालाब से लेकर हरित क्षेत्र तक को अनुसंधान से जोड़ा जाएगा
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