पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर ओवरलोड स्लीपर बस पर कार्रवाई:47 सीटों की बस में मिले 167 यात्री, छत पर भी बैठे मिले 35 लोग

Actionpunjab
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पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर परिवहन विभाग की जांच में एक स्लीपर बस में यात्रियों की जान से खिलवाड़ का मामला सामने आया। गोरखपुर की ओर से आ रही एक बस में क्षमता से तीन गुना ज्यादा लोग सफर करते मिले। बस में जहां 47 यात्रियों के बैठने की अनुमति थी, वहीं 167 लोग यात्रा कर रहे थे। इनमें 35 यात्री बस की छत पर बैठे हुए थे। परिवहन विभाग ने बस को तुरंत सीज कर दिया। जांच में खुली ओवरलोडिंग की पोल सोमवार सुबह परिवहन विभाग की टीम ने बस संख्या UP11BT0077 को रोककर जांच की। जांच के दौरान बस के अंदर 132 यात्री और छत पर 35 यात्री बैठे मिले। अधिकारियों के मुताबिक बस में यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर भरा गया था, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। 47 यात्रियों की अनुमति, सफर कर रहे थे 167 लोग जांच में पता चला कि बस 10 स्लीपर और 37 सीटों के लिए पंजीकृत है। यानी इसमें कुल 47 यात्रियों के सफर की अनुमति है। इसके बावजूद बस में 120 अतिरिक्त यात्रियों को बैठाकर यात्रा कराई जा रही थी। परिवहन विभाग ने इसे गंभीर नियम उल्लंघन माना है। बिहार से पंजाब जा रहे थे श्रमिक पूछताछ में यात्रियों ने बताया कि वे ज्यादातर श्रमिक हैं और बिहार के मुजफ्फरपुर क्षेत्र से पंजाब के पटियाला जा रहे थे। बस कुशीनगर बॉर्डर से उत्तर प्रदेश में दाखिल हुई थी और गोरखपुर होते हुए लखनऊ के रास्ते पंजाब जा रही थी। यात्रियों को दूसरे वाहनों से भेजा गया कार्रवाई के बाद यात्रियों को बीच रास्ते में नहीं छोड़ा गया। परिवहन निगम की दो बसों और वाहन स्वामी के एक अन्य वाहन की व्यवस्था कर उन्हें उनके गंतव्य की ओर रवाना किया गया। वहीं पकड़ी गई बस को पी-4 पार्किंग में खड़ा कर सीज कर दिया गया। परमिट और लाइसेंस पर भी कार्रवाई की तैयारी अधिकारियों के अनुसार बस का ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट पहले ही समाप्त हो चुका है। ऐसे में विभाग ने बस का परमिट रद्द करने और चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की है। साथ ही बस की तकनीकी जांच भी कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्लीपर बसों के लिए तय सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी चिंता इस कार्रवाई ने एक बार फिर निजी बसों में ओवरलोडिंग के गंभीर मुद्दे को सामने ला दिया है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि क्षमता से कई गुना ज्यादा यात्रियों को बैठाकर बस चलाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की जान को भी खतरे में डालने जैसा है।

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