जंतर-मंतर पर सजी डॉग फ्री पंचायत:नुक्कड़ नाटक के जरिए पशु प्रेमियों ने सिस्टम को झकझोरा, जुर्माना बढ़ाने पर उठाए सवाल

Actionpunjab
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नई दिल्ली। देशभर में बेजुबान जीवों के खिलाफ बढ़ती क्रूरता और हिंसा के विरोध में शनिवार को जंतर-मंतर पर बड़ा जन-आंदोलन देखने को मिला। रोर 4 राइट्स (Roar4Rights) के बैनर तले जुटे सैकड़ों नागरिकों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और मशहूर हस्तियों ने स्ट्रीट डॉग्स के अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला जमीनी हकीकत के बजाय मीडिया रिपोर्ट्स पर अधिक आधारित प्रतीत होता है, जो प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण है। इसके खिलाफ देश भर में गांधीवादी मार्ग पर आंदोलन चलाया जाएगा। मशहूर संगीतकार मोहित चौहान और राहुल राम ने सुरों से दिया समर्थन इस जन-आंदोलन को समाज के हर वर्ग का साथ मिला। प्रदर्शन में वकीलों, स्थानीय पशु प्रेमियों और कई रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (RWA) के प्रतिनिधियों के साथ-साथ बॉलीवुड के जाने-माने संगीतकार मोहित चौहान और ‘इंडियन ओशन’ बैंड के राहुल राम भी पहुंचे। दोनों कलाकारों ने बेजुबानों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए मंच से गीत भी गाए। समाज और प्रशासन की उदासीनता पर प्रहार करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर एक मॉक ‘डॉग फ्री पंचायत और पुलिस स्टेशन’ नुक्कड़ नाटक का भी मंचन किया। प्रदर्शनकारियों की 4 प्रमुख मांगें 1960 के कानून और ₹50 के जुर्माने पर भड़के कार्यकर्ता प्रदर्शन के दौरान पशु अधिकार कार्यकर्ता निमिषा भगत ने कानून की विसंगतियों को रेखांकित करते हुए कहा, “देश में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA) 1960 में बना था। आज 64 साल बीत जाने के बाद भी इस कानून की धारा 11 के तहत बेजुबानों पर जुल्म करने वालों पर महज 50 रुपये का जुर्माना है, जो बेहद हास्यप्रद है। इस मामूली जुर्माने को तुरंत बढ़ाकर ₹96,000 किया जाना चाहिए।” सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का पुरजोर विरोध किया, जिसमें सार्वजनिक स्थानों से स्ट्रीट डॉग्स को हटाने और रैबीज संक्रमित या अत्यधिक आक्रामक कुत्तों को इच्छामृत्यु देने की बात कही गई है। रोर4राइट्स की राशिम शर्मा ने प्रशासनिक नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि, सुप्रीम कोर्ट जानवरों को हटाने का आदेश तो दे देता है, लेकिन उनके बड़े पैमाने पर नसबंदी (ABC), वैक्सीनेशन और उनके लिए बड़े स्तर पर अस्पताल बनाने की बात नहीं करता। उदाहरण के लिए, पंजाब सरकार कहती है कि वह 21 दिन में कुत्तों को हटा देगी, लेकिन सरकार यह क्यों नहीं बताती कि वह 21 दिनों में कितनी नई एबीसी (नसबंदी) यूनिट्स तैयार करेगी? प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि नीतियों में सुधार नहीं हुआ, तो यह आंदोलन राष्ट्रव्यापी रूप लेगा।

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