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हरिद्वार में अधिकमास में पड़ रही सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सोमवार को अमावस्या होने के कारण इस विशेष संयोग को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इसी मान्यता के चलते हरकी पैड़ी सहित विभिन्न गंगा घाटों पर भोर से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अब तक करीब 10 लाख श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच चुके हैं और मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर सुख, समृद्धि, शांति और मोक्ष की कामना कर रहे हैं। हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालु उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के साथ पितरों के निमित्त तर्पण, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य कर अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की। तस्वीरें देखिए- 10 लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी से घाटों पर उमड़ा जनसैलाब सोमवती अमावस्या के विशेष संयोग के चलते हरिद्वार में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही। प्रशासन के अनुसार अब तक लगभग 10 लाख श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच चुके हैं। हर की पैड़ी, ब्रह्मकुंड और अन्य प्रमुख घाटों पर स्नान के लिए सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। पूरे मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की जा रही हैं। अधिकमास में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दान और पितृ तर्पण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। अधिकमास में पड़ने के कारण इस बार का संयोग और भी दुर्लभ एवं फलदायी माना जा रहा है। हजारों अश्वमेध यज्ञों के समान मिलता है पुण्य फल हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि सभी अमावस्याएं पुण्यदायी और पितरों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, लेकिन सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में वर्णित है कि सोमवती अमावस्या पर हर की पैड़ी ब्रह्मकुंड, कुंभ क्षेत्र अथवा किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति को सैकड़ों और हजारों अश्वमेध यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। पितृ तर्पण और दान से मिलता है आध्यात्मिक लाभ उन्होंने कहा कि जो लोग किसी कारणवश तीर्थस्थलों तक नहीं पहुंच सकते, वे घर पर ही पवित्र नदियों का स्मरण कर स्नान और पूजा-अर्चना करें तो उन्हें भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है। पंडित त्रिपाठी के अनुसार इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और दान करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर प्रशासन की विशेष नजर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। मेला क्षेत्र को 6 सुपर जोन, 16 जोन और 46 सेक्टरों में विभाजित कर अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। हर की पैड़ी और प्रमुख घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है, जबकि सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। विशेष ट्रैफिक प्लान से सुचारू रहा आवागमन यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। पार्किंग स्थलों, डायवर्जन मार्गों और भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिसकर्मी लगातार सक्रिय रहे। प्रशासन का प्रयास रहा कि 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद स्नान और आवागमन की व्यवस्था सुचारू बनी रहे तथा किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। भक्ति और आस्था से सराबोर हुई धर्मनगरी सोमवती अमावस्या के इस पावन अवसर पर हरिद्वार एक बार फिर श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपराओं के रंग में रंगा नजर आया। गंगा तटों पर गूंजते “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के जयकारों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। 10 लाख श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस धार्मिक पर्व की भव्यता को और अधिक विशेष बना दिया।
हरिद्वार- सोमवती अमावस्या पर 10 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी:12 राज्यों से पहुंचे यात्री; हरकी पैड़ी पर पैर रखने की जगह नहीं मिली
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