रंभा तीज बुधवार को:सुखी वैवाहिक जीवन और सौभाग्य की कामना से किया जाता है रंभा तीज व्रत, जानिए व्रत और पूजा की विधि

Actionpunjab
2 Min Read




बुधवार, 17 जून को ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया यानी रंभा तीज है। यह व्रत महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और घर-परिवार में सुख-समृद्धि, शांति बनाए रखने की कामना से यह व्रत करती हैं। तीज तिथि पर माता पार्वती की विशेष पूजा करने की परंपरा है, इसलिए इस तिथि पर शिव-पार्वती की विधिवत पूजा की जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, जो लड़किया अविवाहित हैं, वे मनचाहा वर पाने की कामना से यह व्रत करती हैं। इस व्रत में कन्याएं भगवान शिव और माता पार्वती का अभिषेक करती हैं और दिनभर निराहार रहकर भक्ति करती हैं। शाम को भी विधिवत पूजा की जाती है। रंभा तीज का धार्मिक महत्व तीज पर्वों का विशेष महत्व बताया गया है। हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज की तरह ही रंभा तीज भी महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण व्रत है। मान्यता है कि इस दिन किए गए व्रत और पूजा से वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और स्थिरता बनी रहती है।
ऐसा माना जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी तप का ध्यान करते हुए महिलाएं ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया पर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। इस तिथि को क्यों कहते हैं रंभा तीज रंभा तीज के संबंध में मान्यता है कि प्राचीन समय में स्वर्ग की अप्सरा एक थी रंभा। रंभा को अत्यंत सुंदर, गुणवान और आकर्षक अप्सरा बताया गया है। कहा जाता है कि रंभा ने भी मनोवांछित सुख पाने की कामना से इस तिथि पर व्रत-पूजा की थी। इसी कारण इस तृतीया तिथि को रंभा तृतीया या रंभा तीज नाम मिला। ऐसे कर सकते हैं व्रत-पूजा

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *