अब एसी चलाने पर भी कम आएगा बिजली बिल:जयपुर में शुरू हुआ स्मार्ट एसी मिशन, 2 हजार घरों में लगेगी आईओटी डिवाइस, घटेगी बिजली खपत

Actionpunjab
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बिजली की बढ़ती मांग और ग्रिड पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए जयपुर डिस्कॉम ने एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत वैशाली नगर, मानसरोवर और मालवीय नगर के करीब 2 हजार घरेलू उपभोक्ताओं के एयर कंडीशनर (एसी) में मुफ्त स्मार्ट आईओटी डिवाइस लगाई जा रही है। इस तकनीक के जरिए पीक ऑवर्स में एसी की बिजली खपत को स्वचालित रूप से नियंत्रित किया जाएगा, जिससे बिजली की बचत के साथ ग्रिड का बेहतर प्रबंधन भी संभव हो सकेगा।
डिस्कॉम ने यह पायलट प्रोजेक्ट प्रौद्योगिकी कंपनी फ्लॉक एनर्जी के सहयोग से शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार देश में पहली बार किसी विद्युत वितरण निगम की ओर से घरेलू उपभोक्ताओं के एसी को ऑटोमेटेड डिमांड रिस्पांस (एडीआर) तकनीक से जोड़कर बिजली की मांग को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी आने के साथ-साथ बिजली व्यवस्था भी अधिक मजबूत होगी।
पीक ऑवर्स में कम होगा बिजली तंत्र पर दबाव
गर्मी के मौसम में एसी का उपयोग बढ़ने से बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे ग्रिड और विद्युत तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। नई एडीआर तकनीक ऐसे समय में एसी की बिजली खपत को नियंत्रित करेगी। इससे बिजली की मांग संतुलित रहेगी और ग्रिड को ओवरलोड होने से बचाया जा सकेगा।
डिस्कॉम अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना राजस्थान विद्युत नियामक प्राधिकरण के डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी एवं डिमांड साइड मैनेजमेंट विनियम-2026 के तहत शुरू की गई है। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भविष्य में इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। ऐसे काम करेगी स्मार्ट आईओटी डिवाइस
एडीआर डिवाइस दो हिस्सों में काम करती है। इसका एक भाग घर के सामान्य बिजली सॉकेट में लगाया जाता है, जबकि दूसरा भाग एसी यूनिट पर लगाया जाता है। यह डिवाइस घर के वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से ग्रिड प्रबंधन प्रणाली से जुड़ी रहती है।
जब बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचती है, तब यह डिवाइस कमरे के आरामदायक तापमान को बनाए रखते हुए एसी के तापमान में करीब एक डिग्री की बढ़ोतरी कर देती है। इससे उपभोक्ता को किसी बड़े बदलाव का एहसास नहीं होता, लेकिन बिजली की खपत कम हो जाती है।
उपभोक्ताओं को मिलेगा बिजली बिल में फायदा
डिस्कॉम के अनुसार यदि एसी प्रतिदिन 6 से 8 घंटे तक चलाया जाए तो इस तकनीक की मदद से बिजली की खपत में 3 से 6 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। इससे सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बचत होगी।
अधिकारियों का मानना है कि 2 हजार उपभोक्ताओं के एसी को इस तकनीक से जोड़ने पर बिजली मांग में करीब 1 मेगावाट तक की कमी लाई जा सकती है। यह बचत पीक ऑवर्स में बिजली व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या भी होगी कम
बिजली की मांग नियंत्रित रहने से ग्रिड और वितरण तंत्र पर दबाव कम होगा। इससे फॉल्ट और ट्रिपिंग की घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है। उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर वोल्टेज और बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति मिल सकेगी।
डिस्कॉम का मानना है कि यह परियोजना ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, बिजली बचत को प्रोत्साहित करने और भविष्य के स्मार्ट ग्रिड सिस्टम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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