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बारां जिले के ग्राम रेलावन की कविता ने आमदनी बढ़ाने के लिए खेती में अलग नवाचार किया है। उनके घर में आजीविका का एकमात्र जरिया खेती ही है। पारंपरिक रूप से उनका परिवार सोयाबीन, धान, सरसों और गेहूं की फसल लेता आ रहा है, जिससे सालभर में तीन से चार लाख रुपए की आय होती रही। लेकिन पारिवारिक खर्चों को देखते हुए यह कम पड़ता था। ऐसे में कविता ने पारंपरिक खेती पर निर्भरता कम करने के बारे में सोचा और बहुस्तरीय खेती (मल्टी लेयर फार्मिंग) की तकनीक और उसके प्रबंधन का प्रशिक्षण लिया। 8 तरह की फसलों को उगाया इसके बाद कविता ने अपने खेत के मात्र 200 वर्ग मीटर के हिस्से में इस नए प्रयोग की शुरुआत की। उन्होंने इस सीमित जगह में एक साथ 8 प्रकार की फसलों का उत्पादन शुरू कर दिया। जमीन के अंदर उगने वाली (जड़ वाली), जमीन के ऊपर बढ़ने वाली, बेलदार फसलों और पत्तेदार सब्जियों को एक साथ एक ही ब्लॉक में लगाया। मल्टी लेयर फार्मिंग कम जगह में 3 से 4 गुना अधिक मुनाफा दे रही है। इस तकनीक में एक ही समय में, अलग-अलग ऊंचाई और गहराई वाली आठ-दस फसलों को एक साथ उगाया जाता है। जमीन के नीचे अदरक या हल्दी, सतह पर धनिया या पालक, ऊपर मिर्च या टमाटर और बांस के मचान पर बेल वाली सब्जियां जैसे लौकी और करेला लगा रखी हैं। इससे पानी, खाद की खपत भी बहुत कम हो रही। सालभर लगातार आमदनी मिलती रहती है और जैविक तरीकों के उपयोग से लागत कम व मुनाफा 40 हजार से 60 हजार रुपए से अधिक हो जाता है। 5 हजार की अतिरिक्त आमदनी इस मॉडल के एक साल में तीन से चार बार सब्जियां ली हैं। पूरे साल लगातार उत्पादन मिलता रहता है। इस तकनीक से कविता को पहले ही सीजन में 15 हजार की अतिरिक्त आमदनी हुई। इस मॉडल को पूरी तरह पर्यावरण और स्वास्थ्य के अनुकूल रखा गया है, जिसमें जैविक खेती ही की जा रही है। रासायनिक दवाओं का उपयोग न के बराबर करने की जरूरत रहती है। कविता ने बताया कि गौ संवर्धन योजना के जरिए उनके खेत पर वर्मी बेड तैयार करवाए गए हैं। गाय और भैंस के गोबर की खाद तैयार की जा रही है। स्वयं सेवी संस्था सृजन ने बांस का ढांचा तैयार कराने के साथ ट्रेनिंग भी दी।
जमीन में हल्दी, सतह पर पालक, बेलों पर लौकी-करेले उगाए:महिला किसान ने 200 वर्ग मीटर में बनाया सब्जी बैंक
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