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छोटे लोहिया के नाम से मशहूर जनेश्वर मिश्र की जयंती पर समाजवादी पार्टी 5 अगस्त को ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी में जुटी है। इस आयोजन के जरिए वह ब्राह्मणों को लुभाने की कवायद कर रही है। सोमवार को बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सपा के इस प्रयास पर तीखा कटाक्ष किया। मायावती ने कहा कि 2007 की तरह जब प्रदेश का ब्राह्मण समाज बसपा से जुड़ने लगा तो सपा की नींद उड़ गई थी।बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी ब्राह्मण समाज के साथ-साथ क्षत्रिय और वैश्य समाज को भी उचित प्रतिनिधित्व देने को तैयार है। पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव में इन समाजों से प्रत्याशी बनाने का सिलसिला शुरू भी कर दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि ब्राह्मण समाज को साथ लेकर ही बसपा ने 2007 में अकेले बहुमत की सरकार बनाई थी। कुछ इसी तर्ज पर ब्राह्मण समाज 2027 में भी बसपा के साथ जुड़कर प्रदेश में बसपा की सरकार बनाने का मन बना चुका है। बसपा से ब्राह्मण समाज के जुड़ाव से सपा में बेचैनी मायावती ने कहा कि जब से ब्राह्मण समाज बसपा से जुड़ना शुरू हुआ है, तब से विपक्षी पार्टियों, खासकर सपा में बेचैनी साफ दिख रही है। यूपी जैसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश में अपर कास्ट में शामिल ब्राह्मण समाज का हित बसपा में ही सुरक्षित है। ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर पार्टी पहले भी ब्राह्मण समाज को साथ लेकर सरकार बना चुकी है। सरकार बनने पर ब्राह्मण समाज को भरपूर आदर-सम्मान के साथ सरकार और संगठन दोनों में पूरी भागीदारी दी गई।जबकि दूसरी पार्टियों की सरकारों में ऐसा कम ही होता है। वे ब्राह्मण समाज का वोट तो चाहते हैं, लेकिन संगठन और सरकार में उचित भागीदारी नहीं देना चाहते। इसी कारण ब्राह्मण समाज आज खुद को ठगा हुआ और उपेक्षित महसूस कर रहा है। ब्राह्मण समाज को प्रत्याशी बनाने का क्रम शुरू मायावती ने कहा कि ब्राह्मण समाज सामाजिक भाईचारे के आधार पर बसपा से जुड़ने को तैयार है। इसी को ध्यान में रखकर इस समाज के लोगों को पार्टी का प्रत्याशी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ब्राह्मण समाज को पार्टी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। उन्हें यकीन है कि सरकार बनने पर इस बार भी उन्हें पूर्व की तरह उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। क्षत्रिय व वैश्य समाज को भी जोड़ने पर जोर मायावती ने सामान्य वर्ग के क्षत्रिय, वैश्य सहित अन्य समाजों को बसपा से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि “जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” के आधार पर बसपा 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाएगी। बसपा प्रमुख ने कहा कि दूसरी पार्टियों की तरह उनकी पार्टी कुछ लोगों को लॉलीपॉप थमाने की संकीर्ण और स्वार्थपूर्ण राजनीति नहीं करती। बसपा को समाज के हित और कल्याण की चिंता है। बसपा की नीति हमेशा से जनहित, अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को मजबूत कर प्रदेश को देश में आगे ले जाने की रही है।
सपा के ब्राह्मण सम्मेलन पर बसपा का कटाक्ष:मायावती बोलीं- 2007 की तरह ब्राह्मणों का बसपा से जुड़ाव सपा की नींद उड़ा रहा है
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