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- Jyeshtha Purnima On 29th June, Significance Of Purnima, Lord Vishnu Krishna Abhishek Vidhi, Hanuman Puja, Sundarkand Path
8 घंटे पहले
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आज (26 जून) ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। इस महीने के अंतिम तिथि यानी पूर्णिमा 29 जून को है। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर संत कबीर दास जी की जयंती भी मनाई जाती है। इस साल ज्येष्ठ 59 दिनों का है, क्योंकि इस महीने में एक अतिरिक्त महीना यानी अधिक मास भी था। हिन्दी पंचांग में करीब तीन साल में एक बार अधिक मास आता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पूजा-पाठ के साथ ही नदी स्नान और भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ने-सुनने की भी परंपरा है। इस दिन किए गए धर्म-कर्म से अक्षय पुण्य मिलता है। अक्षय पुण्य यानी ऐसा पुण्य, जिसका असर जीवनभर बना रहता है। पूर्णिमा तिथि पर ज्येष्ठ खत्म होगा और फिर अगले दिन यानी 30 जून से आषाढ़ मास शुरू हो जाएगा।
जानिए ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…
- पूर्णिमा पर गंगा, यमुना, अलकनंदा, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। अगर किसी कारणवश नदी तक जाना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के दौरान सभी पवित्र नदियों, तीर्थस्थलों और देवस्थानों का ध्यान करना चाहिए। ऐसे स्नान करने से भी तीर्थस्नान के समान पुण्य मिल जाता है। ऐसी मान्यता है।
- पूर्णिमा पर सुबह जल्दी जागना चाहिए और सूर्योदय के समय सूर्यदेव की पूजा से करनी चाहिए। स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। अर्घ्य देते समय ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जप करें।
- इस दिन भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी का विधिपूर्वक अभिषेक करना चाहिए। दक्षिणावर्ती शंख में दूध लेकर उसमें थोड़ी-सी केसर मिलाएं और इस केसर मिश्रित दूध से भगवान का अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल से पुनः अभिषेक करें। भगवान को पीले रंग के सुंदर वस्त्र अर्पित करें। सुगंधित पुष्पों से उनका श्रृंगार करें। इत्र चढ़ाएं। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं, धूप-दीप प्रज्वलित करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करते हुए आरती करें। पूजा के बाद परिवार और अन्य लोगों में प्रसाद वितरित करें, स्वयं भी लें।
- घर के मंदिर में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप बाल गोपाल की भी विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। बाल गोपाल का अभिषेक करके नए वस्त्र पहनाएं। पुष्पों से श्रृंगार करें। कृं कृष्णाय नमः मंत्र का जप करें। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ अर्पित करें, धूप-दीप जलाकर आरती करें।
- भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा के साथ ही श्रीमद् भगवद् गीता, विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों का पाठ भी कर सकते हैं। ग्रंथों का पाठ अपने समय के अनुसार कर सकते हैं।
- पूर्णिमा पर भगवान हनुमान की भी विशेष पूजा की जाती है। हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर पर्याप्त समय उपलब्ध हो, तो सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। आप चाहें तो राम नाम का जप भी कर सकते हैं।
- इस तिथि पर भगवान शिव का भी विधिवत अभिषेक करना चाहिए। अगर समय कम हो, तो शिवलिंग पर जल और बिल्व पत्र चढ़ाकर भी पूजा कर सकते हैं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
- ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। किसी गोशाला में गायों के लिए हरी घास का दान करें, उनकी देखभाल के लिए यथाशक्ति धन का दान करें। मंदिरों में पूजा सामग्री का दान करना भी शुभ माना जाता है। जरूरतमंद और असहाय लोगों को धन, वस्त्र, अनाज, जूते-चप्पल अथवा अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना चाहिए, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है और समाज में सेवा का भाव बढ़ता है।
