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राजस्थान में नवाचार, उद्यमिता एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से भामाशाह टेक्नो हब, जयपुर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “अनलॉकिंग राजस्थान्स स्टार्टअप पोटेंशियल : बिट्स बायोसाइटीआईएच नेक्सस – नवाचार एवं उद्यमिता के अवसर” अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यशाला का आयोजन बिट्स बायोसाइटीआईएच फाउंडेशन, इंटरनेशनल सोसायटी फॉर लाइफ साइंसेज (आईएसएलएस), लेट्स स्टार्ट तथा आईस्टार्ट द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। ईसीएच इन्क्यूबेशन सेंटर, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर इस आयोजन का स्टार्टअप कैटेलिस्ट रहा। उद्घाटन सत्र में प्रो. सुधीर कुमार बराई, निदेशक, बिट्स पिलानी, प्रदीप ओझा, निदेशक, एमएसएमई, प्रो. अशोक कुमार, अध्यक्ष, आईएसएलएस तथा डॉ. अनिल वाली ने नवाचार आधारित उद्यमिता को राजस्थान के विकास का प्रमुख आधार बताया। इस अवसर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु फैकल्टी इनोवेशन एवं स्टार्टअप ट्रांसलेशन (एफआईएसटी) अनुदान कार्यक्रम का भी शुभारम्भ किया गया, जिसके अंतर्गत नवाचार आधारित परियोजनाओं को ₹75 लाख तक की सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में एआईसीटीई के नवाचार प्रकोष्ठ से आये डॉ. दीपन साहू, “प्रयोगशाला से बाजार तक” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया तथा शोध आधारित नवाचारों के व्यावसायीकरण की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला।
दोनों दिनों में नीति, वित्तपोषण, निवेश, शैक्षणिक सहयोग तथा स्थानीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पर विशेषज्ञ पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं। इनमें श्री महावीर प्रताप शर्मा (स्विशिन वेंचर्स), डॉ. शीनू झंवर (टाई राजस्थान), अनिला चोरड़िया (एमएसएमई), डॉ. अनिल वाली, प्रो. अशोक कुमार, विकास रुस्तगी, प्रो. सुमिता कच्छवाहा, डॉ. सुनील छींपा सहित अनेक विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चाओं का संचालन डॉ. अक्षय जैन तथा डॉ. जे. एम. एस. मूर्ति ने किया। कार्यक्रम के प्रथम दिवस आयोजित आइडियाथॉन एवं स्टार्टअप पिचिंग प्रतियोगिता में राज्यभर से चयनित नवाचारकर्ताओं एवं स्टार्टअप संस्थापकों ने अपने अभिनव विचार एवं व्यावसायिक मॉडल प्रस्तुत किए। निवेशकों एवं विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को व्यवहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया तथा संभावित निवेश एवं इन्क्यूबेशन अवसरों पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. जे. एम. एस. मूर्ति ने बिट्स बायोसाइटीह फाउंडेशन की अत्याधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार सुविधाओं—ओमिक्स लैब, डिवाइस लैब, फैब्रिकेशन लैब, बायोसेंसर लैब तथा इन्क्यूबेशन सुविधाओं—का विस्तृत परिचय कराया और प्रतिभागियों को उपलब्ध सहयोग योजनाओं की जानकारी दी। समापन समारोह में श्री कुलदीप रांका, आईएएस, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने नवाचार आधारित उद्यमिता को राज्य के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए युवाओं से रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजित करने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रो. सुमिता कच्छवाहा तथा प्रो. अशोक कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नवाचारकर्ताओं एवं स्टार्टअप्स को पुरस्कार, प्रमाण-पत्र एवं विशेष सम्मान प्रदान किए गए। चयनित स्टार्टअप्स को निवेशकों से संवाद, इन्क्यूबेशन सहयोग तथा आगे की मेंटरशिप के अवसर भी उपलब्ध कराए गए। आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला ने अपने सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करते हुए राजस्थान में नवाचार, अनुसंधान आधारित उद्यमिता तथा स्टार्टअप संस्कृति को नई गति प्रदान की है। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, युवा नवाचारकर्ताओं तथा स्टार्टअप संस्थापकों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम की सफलता पर आयोजकों प्रो. हेमंत पारीक, डॉ. जे. एम. एस. मूर्ति तथा डॉ. सुनील छींपा ने सभी मुख्य अतिथियों, वक्ताओं, निवेशकों, पैनल विशेषज्ञों, प्रतिभागियों, स्वयंसेवकों, सहयोगी संस्थानों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग से यह कार्यशाला राजस्थान के नवाचार एवं स्टार्टअप परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुई।
जयपुर में स्टार्टअप्स और नवाचारों को मिलेगी नई उड़ान:75 लाख तक की सहायता के लिए 'FIST' अनुदान कार्यक्रम शुरू
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