राव इंद्रजीत सिंह की नाराजगी की दो बड़ी वजह:प्रोटोकॉल की अनदेखी और कैबिनेट फेरबदल से पहले प्रेशर पॉलिटिक्स; CM के कार्यक्रम में नहीं गए

Actionpunjab
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रेवाड़ी के बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में आयोजित मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम से केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह की दूरी अब अहीरवाल की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गई है। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। एक ओर राव समर्थक कार्यक्रम में प्रोटोकॉल का पालन नहीं होने को उनकी अनुपस्थिति की वजह बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक जानकार इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल से पहले दबाव की राजनीति का हिस्सा भी मान रहे हैं। इस कार्यक्रम से केवल राव इंद्रजीत सिंह ही नहीं, बल्कि रेवाड़ी जिले के तीनों भाजपा विधायक और संगठन व सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे उनके कई समर्थक भी अनुपस्थित रहे। इससे राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला है। हालांकि, आधिकारिक रूप से किसी भी पक्ष ने विवाद की पुष्टि नहीं की है। समर्थकों ने उठाया प्रोटोकॉल का मुद्दा राव इंद्रजीत सिंह के समर्थकों का कहना है कि कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि केंद्रीय राज्यमंत्री होने के बावजूद राव इंद्रजीत सिंह को नियमानुसार निमंत्रण नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, मंच पर संबोधन करने वाले अतिथियों की सूची में भी उनका नाम कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के बाद रखा गया था। समर्थकों का यह भी कहना है कि राव इंद्रजीत सिंह मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री को क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर एक मांगपत्र सौंपना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि इस पर बाद में चर्चा की जाएगी। समर्थकों के अनुसार बाद में आयोजकों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्हें मनाने के लिए प्रतिनिधिमंडल भी भेजा गया, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम में नहीं जाने का निर्णय बरकरार रखा। विधायक बोले- मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जाना दायित्व रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने कहा कि उन्हें कृषि विश्वविद्यालय की ओर से फोन कर कार्यक्रम का निमंत्रण दिया गया था। उन्होंने कहा कि जब किसी जिले में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम होता है तो उसमें शामिल होना जनप्रतिनिधि का दायित्व होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि औपचारिक निमंत्रण नहीं भी मिलता, तब भी वे कार्यक्रम में जाते। हालांकि उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की घोषणा से पहले ही उनका गुजरात दौरा तय हो चुका था, इसलिए वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। वीसी बोले- सभी प्रक्रियाओं का किया पालन हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी.आर. कंबोज ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन में सभी सरकारी नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य “खेत बचाओ अभियान” के माध्यम से किसानों और आमजन को खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश देना था। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री दोनों ने इस अभियान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया और किसानों को इसके लिए संकल्प भी दिलाया। दो विधायकों का पक्ष नहीं आया सामने बावल विधायक डॉ. कृष्ण कुमार और कोसली विधायक अनिल यादव से इस मामले में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। दोनों को फोन और व्हाट्सएप संदेश भेजे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इससे पहले डॉ. कृष्ण कुमार ने तबीयत खराब होने और अनिल यादव ने शहर से बाहर होने की वजह से कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की बात कही थी। क्या था पूरा मामला मंगलवार को हिसार कृषि विश्वविद्यालय की ओर से बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में “खेत बचाओ अभियान” के समापन समारोह का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की, जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि थे। हालांकि क्षेत्र के सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। उनके साथ रेवाड़ी जिले के तीनों भाजपा विधायक और राव समर्थक कई प्रमुख नेता व पदाधिकारी भी कार्यक्रम से दूर रहे। इससे कार्यक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। पहले से गुटों में बंटी है अहीरवाल भाजपा राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अहीरवाल क्षेत्र, विशेषकर रेवाड़ी भाजपा, लंबे समय से अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है। सबसे प्रभावशाली गुट केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह का माना जाता है, जिनके समर्थक संगठन और विभिन्न पदों पर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। दूसरा गुट उद्योग एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह का है, जबकि तीसरा गुट पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं का माना जाता है, जो दोनों प्रमुख नेताओं से समान दूरी बनाए रखते हैं। इसी गुटबाजी के कारण कई बार सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों में भी इसका असर दिखाई देता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर अहीरवाल भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि पार्टी की ओर से इस पूरे मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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