July 2026 vrat parv list, devshayani ekadashi significance, chatumas rituals, guru purnima 2026

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9 घंटे पहले

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2026 का सातवां महीना जुलाई शुरू हो गया है। इस महीने में योगिनी एकादशी, देवशयनी एकादशी, चातुर्मास की शुरुआत और गुरु पूर्णिमा जैसे व्रत-पर्व आएंगे। जानिए जुलाई में किस दिन कौन सा व्रत-पर्व किया जाएगा और किस दिन कौन सा शुभ काम करें…

14 जुलाई तक रहेगा आषाढ़ मास का कृष्ण पक्ष

  • 3 जुलाई (शुक्रवार) को संकष्टी चतुर्थी का व्रत है। इस दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन शाम को चंद्र दर्शन करके अर्घ्य भी दिया जाता है।
  • 10 जुलाई (शुक्रवार) को योगिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। मान्यता है कि यह व्रत पापों के अशुभ फलों को खत्म करता है और घर-परिवार में सुख-शांति बनाए रखता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और व्रत करने की परंपरा है।
  • 12 जुलाई (रविवार) को रवि प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस तिथि पर भगवान शिव और देवी पार्वती का विशेष अभिषेक किया जाता है। शाम को यानी प्रदोष काल में भी शिव पूजा खासतौर पर करनी चाहिए।
  • 14 जुलाई (मंगलवार) को आषाढ़ अमावस्या है। इस दिन पितर देवता के लिए धूप-ध्यान और तर्पण आदि शुभ काम करना चाहिए। इस तिथि पर नदी स्नान और दान-पुण्य करने की भी परंपरा है।

15 जुलाई से 29 जुलाई तक रहेगा आषाढ़ शुक्ल पक्ष

  • 15 जुलाई (बुधवार) से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि शुरू हो जाएगी। इस नवरात्रि में तंत्र-मंत्र से जुड़े साधकों द्वारा देवी सती की दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। सामान्य भक्त देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। गुप्त नवरात्रि 23 जुलाई तक रहेगी।
  • 16 जुलाई (गुरुवार) को पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलेगी। इसी दिन कर्क संक्रांति भी है। सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन सूर्य पूजा के साथ दिन की शुरुआत करनी चाहिए।
  • 17 जुलाई (शुक्रवार) को चतुर्थी व्रत किया जाएगा। यह व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने की कामना से किया जाता है।
  • 25 जुलाई (शनिवार) को देवशयनी एकादशी है। इस तिथि से चार महीनों के लिए भगवान विष्णु के विश्राम का समय शुरू हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु का विशेष अभिषेक करें, व्रत करें। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाते हैं, इन चार महीनों में पूजा-पाठ, जप, ध्यान करने की परंपरा है। यह भगवान विष्णु के विश्राम का समय है, इसलिए इन चार महीनों में विवाह, मुंडन, जनेऊ जैसे संस्कारों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। चातुर्मास 21 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ खत्म होगा।
  • 26 जुलाई (रविवार) को रवि प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन सुबह-शाम शिव जी का विशेष अभिषेक करें।
  • 29 जुलाई (बुधवार) को आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा है। इस दिन अपने गुरु का पूजन करना चाहिए। गुरु को उपहार भेंट करें।
  • 30 जुलाई (गुरुवार) से सावन मास शुरू हो जाएगा। सावन मास में भगवान शिव का पूजन रोज करना चाहिए। अगर विधिवत पूजा नहीं कर पाते हैं, तो शिवलिंग पर जल, बिल्व पत्र और चंदन चढ़ाकर भी सामान्य पूजा कर सकते हैं।

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