9 घंटे पहले
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आज आषाढ़ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है, इस तिथि पर भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए व्रत किया जाता है। शुक्रवार को चतुर्थी तिथि होने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। आज गणपति के साथ ही महालक्ष्मी और शुक्र ग्रह की पूजा का शुभ योग बन रहा है। शुक्र ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है, इसलिए शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाएं। चंदन का लेप करके बिल्व पत्र और फूलों से श्रृंगार करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, शुक्रवार का कारक ग्रह शुक्र है। इस दिन देवी लक्ष्मी की भी विशेष पूजा की जाती है। इसलिए आज गणेश जी के साथ महालक्ष्मी और शुक्र ग्रह की पूजा करनी चाहिए।

गणेश जी के 12 नाम मंत्रों का करें जप
गणेश पूजन में भगवान के 12 नाम वाले मंत्रों का जप करेंगे तो पूजा जल्दी सफल हो सकती है। ऊँ गणाधिपतयै नम:, ऊँ उमापुत्राय नम:, ऊँ विघ्ननाशनाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ ईशपुत्राय नम:, ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:, ऊँ एकदन्ताय नम:, ऊँ इभवक्त्राय नम:, ऊँ मूषकवाहनाय नम:, ऊँ कुमारगुरवे नम:।
महालक्ष्मी की पूजा विधि – महालक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा एक साथ करनी चाहिए। विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमा का अभिषेक करें। वस्त्र अर्पित करें, हार-फूल से श्रृंगार करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। पूजा में विष्णु जी के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय और ऊँ महालक्ष्मयै नमो नम: मंत्र का जप करें।
शुक्र ग्रह के लिए करें दूध का दान- शुक्र ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाएं। सफेद फूलों से श्रृंगार करें। बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल भी चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। शुक्र ग्रह के मंत्र ऊँ शुक्राय नम: का जप करें। पूजा के बाद दूध का दान करें। पं. शर्मा के मुताबिक, जिन लोगों की कुंडली में शुक्र से संबंधित दोष हैं, उन्हें हर शुक्रवार शिव जी की पूजा करनी चाहिए, ऐसा करने से कुंडली के दोष शांत हो सकते हैं।
