कोलकाता38 मिनट पहले
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी बगावत के बीच ममता बनर्जी ने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न कहीं नहीं जाएगा। अगर मुझे रोकना है तो मुझे मारना पड़ेगा।
ममता ने बागी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा, अगर हिम्मत है तो खुलकर BJP में शामिल हो जाओ। क्या तुम्हें लगता है कि मैं खत्म हो गई हूं? मैं जनता के बीच पार्टी का चुनाव चिह्न लेकर जाऊंगी, मेरी आवाज कोई नहीं दबा सकता।”
उन्होंने आरोप लगाया कि बागी नेता अब खुलकर BJP के लिए काम कर रहे हैं। ममता ने कहा, गद्दारी की भी एक सीमा होती है। ममता का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पार्टी के 20 सांसद और 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं।
शनिवार को टीएमसी की पश्चिम बंगाल अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में वह बागी गुट के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के साथ नजर आईं।

ममता ने क्यों चुनौती दी; विधायकों का अलग गुट, सांसदों का NCPI में विलय
ममता का साथ छोड़कर अलग हुए बागी विधायक और सांसद फिलहाल भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं।
- 3 जून को TMC के 80 में से 58 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए थे। उन्होंने अलग गुट बनाया, पार्टी सिंबल और नाम पर दावा किया।
- इसके अलावा 15 जून को टीएमसी के 20 सांसदों ने भी पार्टी छोड़कर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर लिया था।
ममता बोलीं- पार्टी के दम पर चुनाव जीते, अब उसी से गद्दारी कर रहे
- जिन नेताओं ने उनके पार्टी सिंबल पर चुनाव जीता, वही अब कह रहे हैं कि 2023 के बाद पार्टी का अस्तित्व नहीं रहा। पार्टी ने ही उन्हें राजनीतिक पहचान दी, लेकिन अब वे उसी पार्टी के साथ विश्वासघात कर रहे हैं और खुले तौर पर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। अगर हिम्मत है तो खुलकर भाजपा में शामिल हो जाइए।

- कुछ लोगों ने केंद्रीय बलों की मदद से तृणमूल भवन पर कब्जा कर लिया। भवन का किराया अक्टूबर 2027 तक जमा है और पार्टी हर महीने एक लाख रुपए किराया देती है। यह किसी व्यक्ति की संपत्ति नहीं, बल्कि ‘मां, माटी, मानुष’ की संपत्ति है। इमारत पर कब्जा किया जा सकता है, लेकिन लोगों के दिलों पर नहीं।
- भाजपा ने वोट, वोटर लिस्ट और काउंटिंग प्रक्रिया को प्रभावित कर सत्ता हासिल की है। केंद्रीय बलों की मदद से मतगणना केंद्रों पर कब्जा किया गया और पूरी प्रक्रिया को हाईजैक किया गया। इसके बावजूद हमने नई सरकार को स्वीकार किया गया है।
बंगाल चुनाव में हार के बाद बागी गुट ने ऋतब्रत को नेता चुना
3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। TMC के 80 में से 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया था।
इसमें मांग की गई थी कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी थी। 22 जून को हुई प्रतिनिधि बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था।

टीएमसी के बागी विधायकों ने 3 जून को विधानसभा स्पीकर को ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिए समर्थन पत्र दिया था।
ममता के पास अब 22 विधायक और 17 सांसद बचे
टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं।
विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। इसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं।

दो तिहाई सदस्य होने पर मिलती है अलग दल की मान्यता
बागी गुट के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 2 जुलाई को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलकर खुद को असली TMC के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। उन्होंने चुनाव आयोग को पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) की जानकारी दी थी।

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