Federal court blocks Trump’s birthright citizenship order | ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता खत्म करने के आदेश पर रोक: फेडरल कोर्ट बोला- सिटिजनशिप संवैधानिक अधिकार; सरकार को अपील के लिए 7 दिनों का वक्त

Actionpunjab
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वॉशिंगटन डीसी3 घंटे पहले

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अमेरिका के एक फेडरल कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता खत्म करने वाले आदेश पर रोक लगा दी है। न्यू हैम्पशायर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज जोसेफ लाप्लांट ने कहा कि नागरिकता सबसे बड़ा संवैधानिक अधिकार है और इसे छीना नहीं जाना चाहिए।

जज लाप्लांटे ने कहा, ‘यह मामला बहुत गंभीर है। अगर यह नीति लागू हुई, तो बच्चों को अमेरिकी नागरिकता से वंचित कर दिया जाएगा। यह बहुत बड़ा नुकसान है।’ जज ने कहा कि वे इस मामले में क्लास एक्शन स्टेटस (सामूहिक मुकदमा) को मंजूरी देंगे, जिसमें इस आदेश से प्रभावित होने वाले सभी बच्चों को शामिल किया जाएगा।

जज ने अपने फैसले को 7 दिनों के लिए रोका है और ट्रम्प प्रशासन को अपील करने का मौका दिया है। जज ने कहा कि वे इस आदेश को लागू होने से रोकने के लिए एक अस्थायी आदेश जारी करेंगे। इस फैसले की लिखित कॉपी जल्द जारी की जाएगी।

अगर अपील होती है, तो यह मामला ऊपरी अदालतों में जा सकता है। फिलहाल, यह नीति पूरे देश में लागू नहीं होगी, और अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चों को अभी भी नागरिकता मिलती रहेगी।

ट्रम्प ने 20 जनवरी को एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर जन्मजात नागरिकता के अधिकार पर रोक लगाई थी।

ट्रम्प ने 20 जनवरी को एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर जन्मजात नागरिकता के अधिकार पर रोक लगाई थी।

ट्रम्प ने जनवरी में जन्मजात नागरिकता के अधिकार पर रोक लगाई थी ट्रम्प सरकार ने 20 जनवरी, 2025 को अमेरिका में जन्मजात नागरिकता के अधिकार पर रोक लगा दी थी। इस फैसले के तहत, अमेरिका में जन्मे ऐसे बच्चों की नागरिकता देने से इनकार करने का आदेश दिया गया था, जिनके माता-पिता में से कम से कम एक अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड होल्डर) नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- फेडरल जज देश भर में रोक नहीं लगा सकते इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 27 जून को कहा था कि कोई भी फेडरल जज राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेशों पर पूरे देश में रोक नहीं लगा सकता। हालांकि, कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने संबंधी ट्रम्प के आदेश की वैधता पर कोई अंतिम राय नहीं दी और उसे 30 दिनों तक रोक दिया।

अमेरिका में शरण लेने वाले लोगो ने मुकदमा दायर किया अमेरिका के सभी 50 राज्यों में एक फेडरल कोर्ट है। न्यू हैम्पशायर के कोर्ट में एक गर्भवती महिला, दो पेरेंट्स और उनके नवजात बच्चों की ओर से ट्रम्प के फैसले के खिलाफ केस दायर किया गया था। इनका प्रतिनिधित्व अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) और अन्य संगठनों ने किया।

मुकदमे में कहा गया कि यह आदेश लाखों बच्चों और उनके परिवारों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसमें शामिल एक महिला होंडुरास से है, जो अपने चौथे बच्चे को जन्म देने वाली है और अमेरिका में शरण के लिए आवेदन कर चुकी है।

उसने कहा कि वह नहीं चाहती कि उसका बच्चा डर और छिपकर जीने को मजबूर हो। एक दूसरे आदमी प्लेंटिफ ब्राजील से है, जो अपनी पत्नी और मार्च में पैदा हुए अपने बच्चे के साथ फ्लोरिडा में रहता है। वे स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के लिए आवेदन कर रहे हैं।

ट्रम्प के आदेश से 3 स्थितियों में नहीं मिलती नागरिकता

ट्रम्प ने जिस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से जन्मजात नागरिकता कानून को खत्म किया, उसका नाम ‘प्रोटेक्टिंग द मीनिंग एंड वैल्यू ऑफ अमेरिकन सिटिजनशिप’ है। यह आदेश 3 परिस्थितियों में अमेरिकी नागरिकता देने से इनकार करता है।

  • अमेरिका में पैदा हुए बच्चे की मां यदि अवैध रूप से वहां रह रही हो।
  • बच्चे के जन्म के समय मां अमेरिका की वैध, लेकिन अस्थायी निवासी हो।
  • पिता, बच्चे के जन्म के समय अमेरिका का नागरिक या वैध स्थायी निवासी न हो।

अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन जन्मजात नागरिकता का अधिकार देता है। इसके जरिए ही अमेरिका में रहने वाले अप्रवासियों के बच्चों को भी नागरिकता का अधिकार मिलता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भारतीयों पर असर

अमेरिकी सेंसस ब्यूरो के 2024 तक के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में करीब 54 लाख भारतीय रहते हैं। यह अमेरिका की आबादी का करीब डेढ़ फीसदी है।

इनमें से दो-तिहाई लोग फर्स्ट जेनरेशन इमीग्रेंट्स हैं। यानी कि परिवार में सबसे पहले वही अमेरिका गए, लेकिन बाकी अमेरिका में जन्मे नागरिक हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फर्स्ट जेनरेशन इमिग्रेंट्स को अमेरिकी नागरिकता मिलना मुश्किल हो जाएगा।

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